Monday, July 31, 2017

कैसे सीखें अंग्रेजी बोलना ?

1. अपना महौल English बनाएं  : किसी  भी  भाषा  को  सीखने  में  जो  एक  चीज  सबसे  महत्त्वपूर्ण  होती  है  वो  है  हमारा  environment, हमारा  माहौल.  आखिर  हम  अपनी  मात्र -भाषा  छोटी  सी  ही  उम्र   में  कैसे  बोलने  लगते  हैं :- क्योंकि   24X7 हम  ऐसे  माहौल  में  रहते  हैं  जहाँ  वही  भाषा  बोली , पढ़ी, और  सुनी  जाती  है.  इसीलिए  अंग्रेजी  बोलना  सीखना  है  तो  हमें  यथा  संभव  अपने  माहौल  को  English बना  देना  चाहिए.  इसके  लिए  आप  ऐसा  कुछ  कर  सकते  हैं:
  • हिंदी  अखबार  की  जगह  English Newspaper पढना  शुरू  कीजिये.
  • हिंदी  गानों  की  जगह  अंग्रेजी  गाने  सुनिए.
  • अपने interest के English program / movies देखिये.
  • अपने  room को  जितना  English बना  सकते  हैं  बनाइये ….English posters, Hollywood actors,English  books,Cds..जैसे  भी   हो  जितना  भी  हो  make it English.
2. ऐसे लोगों के साथ group बनाएं जो आप ही की तरह स्पोकेन इंग्लिश सीखना चाहते हों : कुछ ऐसे  दोस्त   खोजिये  जो  आप   ही  की  तरह  अंग्रेजी  बोलना सीखना  चाहते  हैं.  अगर  आपके  घर  में  ही  कोई  ऐसा  है  तो  फिर  तो  और  भी  अच्छा  है. लेकिन  अगर  ना  हो  तो  ऐसे  लोगों  को  खोजिये, और  वो  जितना  आपके  घर  के  करीब  हों  उतना अच्छा  है. ऐसे दोस्तों  से  अधिक  से  अधिक  बात  करें  और  सिर्फ  English में. हाँ ,चाहें  तो  आप  mobile पर  भी  यही  काम  कर  सकते  हैं.
3. कोई mentor बना लें: किसी ऐसे व्यक्ति को अपना mentor बना लें जो अच्छी English जानता हो, आपका कोई मित्र, आपका कोई रिश्तेदार, कोई पडोसी, कोई अंग्रेजी सीखाने वाला institute….कोई भी जो आपकी मदद के लिए तैयार हो. आपको अपने मेंटर से जितनी मदद मिल सके लेनी होगी. अगर आप को मेंटर ना मिले तो भी मायूस होने की ज़रुरत नहीं है आप अपने efforts में लगे रहे, मेंटर मिलने सी आपका काम आसानी से होता लेकिन ना मिलने पर भी आप अपने प्रयास से यह भाषा सीख सकते हैं.
 4. पहले  दिन  से  ही correct English बोलने  का  प्रयास  मत  करें : अगर  आप  ऐसा  करेंगे  तो   आप   इसी  बात  में  उलझे  रह  जायेंगे  की  आप  सही  बोल  रहे  हैं  या  गलत. पहला  एक -दो  महिना  बिना  किसी  tension के   जो  मुंह  में  आये  बोले, ये  ना  सोचें  कि  आप  grammatically correct हैं  या  नहीं.  जरूरी  है  कि  आप  धीरे -धीरे  अपनी  झिझक  को  मिटाएं .
 5. English सीखने के लिए  Alert रहे : वैसे  तो  मैं  अपनी  spoken English का  श्रेय   अपने  school St.Paul’s को  देता हूँ  पर  अंग्रेजी  के लिए  अपनी  alertness की  वजह  से  भी  मैंने  बहुत  कुछ   सीखा  है. मैं  जब  TV पर  कोई  English program देखता  था  तो  ध्यान  देता  था  की  words को  कैसे  pronounce किया  जा रहा  है, और  किसी  word को  sentence में  कैसे  use  किया  जा रहा  है. इसके  आलावा  मैंने  नए  words सीखने  के  लिए  एक  diary भी  बनायीं  थी  जिसमे  मैं  newspaper पढ़ते  वक़्त जो  words नहीं  समझ  आते  थे  वो  लिखता  था, और  उसका use  कर  के एक  sentence भी  बनता  था, इससे  word की  meaning याद  रखने  में  आसानी  होती  थी.
6. बोल  कर  पढ़ें : हर  रोज  आप  अकेले  या  अपने  group में  तेज  आवाज़  में  English का  कोई  article या  story पढ़ें. बोल -बोल  कर   पढने  से  आपका  pronunciation सही  होगा, और  बोलने  में  आत्मविश्वास  भी  बढेगा.
 7. Mirror का use करें  : मैं  English बोलना  तो  जानता  था  पर  मेरे  अन्दर  भी  fluency की  कमी  थी, इसे ठीक  करने  के  लिए  मैं  अक्सर  अकेले  शीशे  के  सामने  खड़े  होकर   English में  बोला  करता  था. और  अभी  भी  अगर  मुझे  कोई  presentation या  interview देना  होता  है  तो  मैं  शीशे   के  सामने  एक -दो  बार  practice  करके  खुद  को  तैयार  करता  हूँ.  आप  भी  अपने  घर  में  मौजूद  mirror का  इस्तेमाल  अपनी  spoken English improve करने  के  लिए  कीजिये.  शीशे  के  सामने  बोलने  का  सबसे  बड़ा  फायदा  है  कि  आप  को  कोई  झिझक  नहीं  होगी  और  आप  खुद  को  improve कर  पाएंगे.
8. Enjoy the process: English बोलना  सीखेने  को  एक  enjoyment की  तरह  देखें  इसे अपने  लिए  बोझ  ना  बनाएं.  आराम  से  आपके  लिए  जो  speed comfortable हो  उस  speed से  आगे  बढें . पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  है  कि  आप  अपने  प्रयत्न  एकदम  से  कम   कर  दें, बल्कि  जब  आप  इसे  enjoy करेंगे  तो  खुद -बखुद  इस  दिशा  में  आपके  efforts और  भी  बढ़  जायेंगे.  आप  ये  भी  सोचें  कि  जब  आप  fluently बोलने  लगेंगे  तब  कितना  अच्छा लगेगा  , आप  का  confidence भी  बढ़  जायेगा  और  आप  सफलता  की  तरफ  बढ़ने  लगेंगे.
 9. English में सोचना शुरू करें : जब  इंसान  मन  में  कुछ  सोचता  है  तो  naturally वो  अपनी  मात्र  भाषा  में  ही  सोचता  है. लेकिन  चूँकि  आप  English सीखने  के  लिए  committed हैं  तो  आप  जो  मन  में  सोचते  हैं  उसे  भी  English में  सोचें. यकीन  जानिये  आपके  ये  छोटे -छोटे  efforts आपको  तेजी  से  आपकी  मंजिल  तक  पंहुचा  देंगे.
10. ऐसी  चीजें  पढ़ें जो समझने में बिलकुल आसान हों: बच्चों की English comics आपकी हेल्प कर सकती है, उसमे दिए गए pictures आपको story समझने  में हेल्प करेंगे और simple sentence formation भी आम बोल चाल में बोले जाने वाले सेंटेंसेस पर आपकी पकड़  बना देंगे.

Sunday, July 30, 2017

वर्षा ऋतु में जरुरी एहतियात बरते

• ध्यान रहे की खाने से पहले फल / सब्जी को अच्छे से स्वच्छ पानी से धो कर साफ कर ले,खास कर हरी पत्तेदार सब्जी।
• बासी भोजन,पहले से कटे हुए फल तथा दुषित भोजन का सेवन न करे ।
• हमेशा ताजा गरम खाना खाए।
• इस मौसम में सब्जी / फल जल्दी ख़राब हो जाते है इसलिए हमेशा ताजा फल या सब्जी का प्रयोग करे।
• इन दिनों में हमारी पाचन शक्ति सबसे कम होती है।इसलिए जरुरी है अधिक तला,भुना खाना न खाया जाए बल्की ऐसा भोजन खाया खाए जो आसानी से पच जाए।जब भूख लगे तब ही और जीतनी भूख हो उतना ही आराम से पचने लायक खाना लेना चाहिए।
• ज्यादा ठंडा,खट्टा न खाए।ज्यादा नमक वाली चीजे जैसे चिप्स,कुरकुरे,चटनी,पापड कम खाए क्योंकी इस मौसम मे शरीर मे water retention कि संभावना ज्यादा होती है।

अपने दातों का ऐसे रखे ख्याल जानिए कुछ जरुरी बातें

dental care  की हम बात करें तो हम जो भी अपने शरीर को चलाने और उर्जा देने के लिए भोजन ग्रहन करते है सब मुहं के रास्ते होकर पेट में जाता है और चूँकि हमारी भोजन सम्बन्धी आदतें अगर बेकार होती है तो आपको देर सबेर परेशानी का सामना उठाना पड़ सकता है क्योंकि health से जुडी सारी problems की mostly पेट से शुरुआत होती है | इसलिए अपने मुंह की साफ सफाई भी उतना ही जरुरी है जितना आपका हर रोज नहाना है | चलिए कुछ hindi में tips जानते है 
dental care  में रोजाना अपने दातों की सफाई करना और प्लांक kavity और वो भोजन के कण जो दातों में खाने के बाद भी फसे हुए रह जाते है उन्हें हटाना और जीभ की भी नियमित तौर से की सफाई ओरल हाईजीन में आती है | अगर आप अपनी दैनिक आदतों में नहाने के बाद deo लगाना भी नहीं भूलते है तो आपके लिए जरुरी है आप ओरल हाईजीन की term को भी अपनी जिन्दगी में लागू करें | हर रोज ब्रश के साथ साथ जीभ और फ्लोसिग के जरिये सही से सफाई रखते हुए मुंह को health problems से बचके रख सकते है |
प्लाक का जमाव – dental care  के दौरान प्लाक की बात करें तो यह असल में एक चिपचिपी परत होती है जो खाने के बाद सही से मुहं की देखभाल नहीं करने वालों के मसूड़ों और दातों के बीच में जम जाती है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम या तो ठीक से ब्रश नहीं करते है और यह करते ही नहीं है | इसके लिए आपको चाहिए एक तो सही विधि से doctor के परामर्श के अनुसार आप नियमित ब्रश करें और इस बात का ध्यान रखें कि शाम में भी खाने के बाद ब्रश करना चाहिए क्योंकि खाने के बाद जमी इस परत में कीटाणु हो सकते है जो आपके दातों की सेहत के लिए हानिकारक है और मसूड़ों को खराब करके कैविटी जमा देती है |
फ्लोसिग का ले सहारा – दातों और मसूड़ों के अलावा मुहं में ऐसी बहुत सारी जगहे होती है जन्हा ब्रश नहीं पहुँच पाते है और इसी वजह से यंहा बहुत कुछ चलता रहता है जो हमारे दातों की सेहत के लिए जरा भी अच्छा नहीं है इसलिए कुछ दूसरे तरीकों से आप यह कर सकते है ऐसे में फ्लोसिंग एक काम का जरिया है अपने मुहं की सफाई में ऐसे में दातों की बीच की जगह जन्हा आम ब्रश के रेशे नहीं पहुँच पाते है उनके बीच से प्लाक और केविटी और अन्य जमे हुए पदार्थो को निकलने का सबसे कारगर और आसान तरीका फ्लोसिंग ही है |dental care के लिए फ्लोसिंग एक की जाने वाली जरुरी क्रिया है |
दातों की सफाई में ये रखें ध्यान / important in dental care  –
  • एक तो बेहतरीन टूथपेस्ट का चुनाव करें और ऐसा आप टीवी add देखकर नहीं करें बल्कि अगर आपको दातों की कोई छोटी मोटी समस्या है तो उसके अनुसार अपने doctor से इस बारे में राय करलें और अजल रोग विशेष के अनुसार टूथपेस्ट भी आते है जो आपके दातों की सवेंदंशीलता से लेकर दूसरी समस्याओं को भी कवर करते है |
  • साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है कि ब्रश का चुनाव करते समय यह सावधानी रखे कि आपके दातों और मसूड़ों की नाजुक परत को वो कोई नुक्सान नहीं पहुंचाए और उसके रेशे नाजुक होने चाहिए |
  • न केवल दातों की बल्कि मसूड़े जो दातं उन्ही foundation पर खड़े है उनकी सही से देखभाल की जानी भी जरुरी है और इसके लिए आप मसूड़ों की मालिश कर सकते है पिपरमेंट के तेल से |
  • दातों को भी व्यायाम चाहिए होता है ऐसा करने के लिए आप ब्रश करने के बाद अपने ऊपर के दातं और नीचे के दातों को आपस में pressure के साथ दबाएँ और फिर खोल दें ऐसा करने से आपके मसूड़ों में खून का भाव भी नियमित हो जाता है |
  • मीठा कम खाएं क्योंकि ऐसी चीज़े जो चीनी से भरपूर होते है वो आपके मुहं में जाकर सदन पैदा करने के काम करती है क्योंकि जितने भी कार्बोहाइड्रेट युक्त खाध्य पदार्थ होते है वो हमारी दातों की इनेमल वाली पर्त को गला देते है इसलिए जरुरत से अधिक मीठे के शौकीन नहीं बने |
दातों की देखभाल नहीं करने से हो सकने वाले नुकसान / loss of unawareness about dental care  –
  • अगर आप दातों की सही से देखभाल नहीं करते है तो आपको मुंह की किसी भी तरह की बीमारी से सामना करना पड़ सकता है |
  • दातों में और मुहं में होने वाली समस्या के कारण व्यक्ति की खाने की आदतों में गड़बड़ हो जाती है जिस से सही मात्रा में भोजन नहीं ले पाते है जिसकी वजह से आपको पोषक तत्वों की कमी का अनुभव होता है और यह आपके लिए परेशानी का कारण बनती है और health problems का भी |
  • आपके दांत आपके जीवन भर साथ रहे इसके लिए आवश्यक है आप नशे से जुडी आदतों से दूर रहे और नियमित दातों की देखभाल करें क्योंकि तम्बाकू आदि से आपको मुहं के cancer की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है |

5 Ways to Improve Your English Communication Skills

1. Slow Down Your Speaking Speed

You might be an eloquent speaker when it comes to your mother tongue, but expecting the same standards from yourself when speaking in a foreign language may not be very realistic.

2. Give Yourself Time to Think

You may be worried that the people you’re talking to are impatient and would like you to say what you want as quickly as possible.
First of all, it may not be true – people often prefer a well-thought-out answer to a rushed one.

3. Learn Sentences, Not Only Words 

In a way, this will take the pressure off too. When you learn a new word, try to memorize a couple of sentences that contain it.
There might come a time when you can use one particular sentence with little, or no alteration at all. Unfortunately, many people learn words by heart, but have no idea how to use them in a sentence.

4. Learn to Listen

When speaking in a foreign language, you might be so focused on what you are saying and whether it’s correct or not, that you forget to listen to what others are saying.

5. Practice Your Interrogatives

We also need to keep in mind the fact that communication is a two-way process. Not only does it make you seem uninterested – even rude – if you don’t ask questions, you might also end up being the one who has to do all the talking. So, when you’ve run out of ideas about what to say next, remember: others might have something to add.
  • What are your views on that?
  • How about you? What do you think?
  • Why do you think there’s so much violence on TV?
Questions like this will keep the conversation going and will show your interest in other people’s opinion. They will also give you time to relax a little and start enjoying yourself.

अपने पालतू कुत्ते के साथ वाक करना रखेगा आपको सेहतमंद

Dogs को कुछ लोग पसंद करते है और कुछ नहीं भी करते यह अपनी पसंद पर निर्भर करता है और खासतौर पर लड़कियां जो है उनमे में से कुछ तो कुत्तों से डरती भी है लेकिन क्या आप जानते है आपके घर में अगर एक dog है तो आपके health के लिए यह अच्छा साबित हो सकता है | थोडा tricky fact है लेकिन फिर भी अगर हम इस बारे में बात करें तो आप पोस्ट के लास्ट में यह बेहतर समझ पाएंगे तो चलिए बात करते है dog health benefits for humans.
मूड ठीक करने में – अगर आपके पास आपका dog है तो यह आपकी मदद करता है आपके mood को बेहतर करने में और आपका bad mood जो है वो happy mood में चेंज करने में मदद करता है यह आपके शरीर में bad mood chemical कहे जाने वाले cortisol के स्तर को कम करते है और Good mood chemical कहे जाने वाले serotonin hormone के स्तर को बढ़ा देता है | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुत्तो में कमाल की क्षमता होती है mood को पहचानने की | ऐसे में हलकी चिंता और तनाव जो आपके ख़राब mood की वजह से होता है वो ठीक हो जाता है आपका pet अगर आपके साथ होता है तो |
दिल की बीमारियों से बचाने में – असल में जब आपके पास एक dog हो तो आप उसे घुमाने के बहाने घर से बाहर जाते है तब आप ज्यादा physical activities करते है तब से ज्यादा जब आप अकेले जाएँ | क्योंकि dog साथ में होता है तो वो थोड़ी अठखेलियां और शरारतें करता है इधर उधर आपसे छूटकर भागने की कोशिश करता है और आप उसे control करते है ऐसे में आपको दिल की बीमारियाँ होने की सम्भावना कम हो जाती है अगर आप अपने pet के साथ daily बाहर जाते है तो |यह आपको एक्टिव रखता है – जैसे कि हमने उपर बात की कि 1-1.5 घंटे की walk अगर आप करते है और अगर आपके साथ आपका dog होता है तो health benefits के नजरिये से आप 30 % तक ज्यादा physical activity करते है |
एलर्जिक पदार्थो के प्रति मजबूती – ऐसा अभी प्रमाणित नहीं है पूर्णत: तो लेकिन फिर भी शोध ये कहते है कि जो बच्चे बचपन के समय से ही pets या dogs के साथ बड़े होते है उनमें पर्यावरण के पदार्थो के प्रति allergy कम हो जाती है |
Blood pressure नियमित – एक शोध के अनुसार जो लोग अपने dog के साथ बाहर जाने का शौक रखते है उन लोगो में blood pressure नियमित रहता है उन कठिन परिस्थितियों में भी जब बाकि लोगो का नहीं होता है |
Cholestrol के लेवल का नियमन – dogs के साथ बाहर जाने वाले लोगो में cholestrol का स्तर भी नियमित हो जाता है क्योंकि यह स्तर हमारे दैनिक जीवन के रूटीन पर निर्भर करता है अगर हम ज्यादा एक्टिव है तो चीजे बेहतर होता है नहीं तो हमे health से जुडी कई तरह की परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है |
तो ये है dog health benefits for humans in hindi और अधिक जानकारी के लिए आप नीचे कमेन्ट कर सकते है साथ ही हमारी वेबसाइट से hindi में health अपडेट पाने के लिए आप हमसे फ्री ईमेल subscription भी ले सकते है या हमे गूगल या फेसबुक पर भी फॉलो कर सकते है |

एक फ़कीर और सिकंदर का राज्य

सिकंदर जब भारत लौटा तो एक फ़कीर से मिलने गया तो सिकंदर को आते देख फ़कीर हंसने लगा इस पर सिकंदर ने ने मन में किया कि ये तो मेरा अपमान है और फ़कीर से कहा “या तो तुम मुझे जानते नहीं हो या फिर तुम्हारी मौत आई है ” जानते हो मैं कौन हूँ | मैं हूँ सिकंदर महान |
इस पर फ़कीर और भी जोर जोर से हंसने लगा |उसने सिकंदर से कहा मुझे तो तुम में कोई महानता नजर नहीं आती मैं तो तुम्हे बड़ा दीन और दरिद्र देखता हूँ तो सिकंदर ने उस से कहा तुम पागल हो गये हो  मैंने पूरी दुनिया को जीत लिया है तो इस पर उस फ़कीर ने कहा ऐसा कुछ नहीं है तुम अभी भी साधारण ही हो  फिर भी तुम कहते तो मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ कि मान लो तुम किसी रेगिस्तान मे फंस गये और दूर दूर तक तुम्हारे आस पास कोई पानी का स्त्रोत नहीं है और कोई भी हरियाली नहीं है जन्हा तुम पानी खोज सको तो तुम एक गिलास पानी के लिए इस राज्य में से क्या दे दोगे |सिकंदर ने कुछ देर सोच विचार किया और उसके बाद बोला कि मैं अपना आधा राज्य दे दूंगा तो इस पर फ़कीर ने कहा अगर मैं आधे राज्य के लिए न मानू तो सिकंदर ने कहा इतनी बुरी हालत में तो मैं अपना पूरा राज्य दे दूंगा | फ़कीर फिर हंसने लगा और बोला कि तेरे राज्य का कुल मूल्य है ” बस एक गिलास पानी ” और तू ऐसे ही घमंड से चूर हुआ जा रहा है | वक़्त पड़ जाये तो एक गिलास पानी के लिए भी तेरा राज्य काफी नहीं होगा फिर रेगिस्तान में चिल्लाना खूब महान सिकंदर महान सिकंदर.

एटीएम को जानिए

History of ATM Machine in Hindi – एटीएम (ATM) का पूरा नाम सब लोग जानते है वो है -ऑटोमेटेड टेलर मशीन (Automated teller machine ) । टेलर शब्द जो है वो सामान्यत कलर्क या केशियर जो होता है उसे इंगित करता है । चूँकि हर एक अविष्कार जो होता है उसकी आवश्कता उसकी जनक होती है । उसी तरह एटीएम की जरुरत पश्चिम देशो में तब पड़ी जब उन लोगो या वित्तीय संस्थाओं को कैश संबधी काम निपटाने वाले कर्मचारिओं की वेतन बढाने की मांग और well skilled लोगो की कमी के चलते संस्थाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता था ।
वैसे भी एटीएम के बाद विभिन्न व्यवसायों में self-service की अवधारणा को बल मिला है साथ ही ग्राहक के लिए भी अब आदान प्रदान पहले से कंही सुविधा जनक हो गया है क्योंकि उन्हें कैश निकलवाने के लिए किसी बाबू या कर्मचारी पर निर्भर नहीं होना पड़ता है साथ ही किसी तरह की कागजी करवाई भी नहीं करनी होती है ।
एटीएम का आविष्कार – इसके आविष्कार का श्रेय ‘लूथर जार्ज सिमियन’ नाम के एक अमेरिकी नागरिक को जाता है । उसने 1939 में ही एटीएम की अवधारणा वाली मशीन तैयार कर ली थी जिसका नाम उसने ‘बैंक मेटिक’ रखा था लेकिन उसके काफी प्रयासों के बाद भी कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था इसके इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं हुई क्योंकि उस समय में भी बैंक पैसे के लेन देन को काफी संवेदनशील मामला मानते थे और ऐसे भी पैसे को किसी मशीन के भरोसे छोड़ने को उन्होंने स्वीकार नहीं किया । ये एक बड़ा जोखिम था लिहाजा कोई भी बैंक इसके इस्तेमाल को तैयार नहीं हुआ ।  इसके बाद भी लूथर ने हिम्मत नही हारी और लगातार इसके विकास में उसने अपनी जिन्दगी के 21 साल लगातार खर्च किये जिसके बाद उसने ‘जून 1960’ में इसके पेटेंट के लिए आवेदन किया । और फरवरी 1960 को उसे इसका पेटेंट मिल भी गया ।
एटीएम का चलन–  लूथर ने इसी समय में न्यूयार्क के एक बैंक जिसे आज के ‘सिटी बैंक ‘ के नाम से जाना जाता है को अपनी बनायी मशीन के प्रयोग के लिए राजी भी कर लिया लेकिन उसके बाद भी यह उतनी लोकप्रिय नहीं हो पाई क्योंकि लोग उस समय किसी मशीन से कैश निकालने की जगह बैंक से ही पैसे निकालने में अधिक सहज महसूस करते थे । लेकिन थोड़े समय बाद जापान में जब ‘क्रेडिट कार्ड ‘ प्रचलन में आया तो लोगो अब ऐसी मशीन की जरुरत महसूस होने लगी थी । जापान में 1966 में ऐसी ही एक मशीन लगायी गयी जिसे ‘Cash dispenser’ के नाम से जाना गया जो समय के साथ बहुत लोकप्रिय हो गयी और कुछ समय बाद यानि के कुछ एक साल बाद ही लन्दन के एक बैंक ने ऐसी ही मशीन लगाने की घोषण करदी । इस तरह अन्य देशो में भी धीरे धीरे एटीएम मशीन को लेकर जागरूकता और जानकारी बढ़ी और यह प्रचलंन में आ गयी ।
बदलाव – शुरुआती समय से लेकर अब तक एटीएम मशीन में तरह तरह के क्रमिक बदलाव हो चुके है और समय के साथ साथ इसके सुरक्षा कारणों और उपायों पर भी काफी काम किया गया है । शुरूआती दौर की मशीन के काम करने के तरीके को ‘मेग्नटिक स्ट्रिप ‘ जो कार्ड के पीछे वाला काला भाग होता है से बदल दिया गया और अब तो अधिक सुरक्षा के लिए ” चिप” तकनीक वाले कार्ड भी आने लगे है । अब अगर आपके पास कोई VISA authorized या अन्य अन्तराष्ट्रीय स्तर का एटीएम कार्ड है तो आप पूरी दुनिया में कंही से भी पैसा निकल सकते है ।

करोड़पति बनना है तो नौकरी छोडिये !

आप अपने शहर के किन्ही पांच करोड़पतियों की list मन में सोचिये….. please इस step को miss मत कीजिये, सोचिये ज़रूर !!!
अब बताइये इस लिस्ट में क्या कोई ऐसा भी है जो नौकरी पेशा है? मेरी लिस्ट में तो नहीं है, मेरे दिमाग में जो नाम आये वो मै आपको बताना चाहूँगा। मैं Dhuri, Punjab  का रहने वाला हूँ और ये लोग वहीँ के हैं
  • चेतना मसाले वाले Uncle,
  •  डॉ. अग्रवाल, जिनका खुद का Hospital है
  • Mr. Jalan-  सरिया वाले
  • मेरे colony के एक uncle जिनके Engineering College चलते हैं, और
  • बरनवाल Uncle, जिनके यहाँ से हम लोग jewellery खरीदते हैं।
इन सभी में एक बात common है। लोग इनके यहाँ नौकरी करते हैं पर ये किसी के यहाँ नौकरी नहीं करते। ये सभी उद्यमी हैं, Entrepreneurs हैं, Businessmen हैं पर employee नहीं हैं।
मैंने कुछ दोस्तों से भी ये प्रश्न किया उनकी सूची में भी किसी नौकरी करने वाले का नाम नहीं था। अब ये बात और है कि आप दीमाग पे जोर डालेंगे तो कुछ ऐसे लोग मिल जायेंगे पर इनमे से ज्यादातर के बाल या तो सफ़ेद हो चुके होंगे या फिर पूरी फसल ही साफ़ हो चुकी होगी। 🙂 अगर बाल सफ़ेद करा कर Crorepati बनना है तो नौकरी  बुरी नहीं है। तीन-चार promotion और 15- 20 साल में आप Crorepati बन ही जायेंगे… पर ऐसे बने तो बच्चों के लिए बनेंगे अपने लिए नहीं…और मज़ा तो अपने लिए बनने में है; क्यों? और अगर अपने लिए Crorepati बनना है तो खुद बनना होगा एक Entrepreneur.
यहाँ एक बात कहना चाहूँगा कुछ लोग ज्यादा पैसा कमाने कि इच्छा रखने वालों को उतनी respect  से नहीं देखते हैं, पर मुझे लगता है कि इस मंहगाई को देखकर उनके विचार में भी बदलाव आ चुका होगा….कितना कमाना ज्यादा कमाना है इसकी परिभाषा बड़ी तेजी से बदल रही है; मेरी नज़र मैं ज्यादा पैसे कमाने की इच्छा रखना एक अच्छी बात है, बशर्ते उसे कमाने के लिए गलत काम न किये जाएँ। और शायद इस article  को भी वही लोग पढ़ रहे होंगे जो ऐसी इच्छा रखते होंगे वरना  article का title पढ़ने के बाद ही वो किसी और topic  पर चले गए होते। चलिए अब आते हैं main मुद्दे पर :

पर नौकरी छोडें कैसे ?

सवाल बिलकुल ठीक है। पर उससे भी बड़ा एक सवाल है:, नौकरी छोड़ी तो करेंगे क्या ?” अगर आपके मन में ये दुसरा सवाल आ रहा है तो उसका मेरे पास कोई जवाब नहीं है। क्योंकि ये तो आपके अंदर से आने वाली आवाज़ है कि आप क्या करना चाहते हैं। और यदि यह नहीं आ रही है तो अभी आप इस तरह के step के लिए बिलकुल तैयार नहीं हैं…पर ये बात पक्की है कि यदि आप चाहें तो समय के साथ खुद को तैयार कर सकते हैं।
लेकिन यदि आप उनमे से हैं जिनका कोई सपना है, जो कुछ बड़ा, कुछ महान, कुछ अपना  करना चाहते हैं तो आपको पहले प्रश्न के बारे में सोचना ही होगा। क्योंकि अगर आप अभी नहीं सोचेंगे तो आगे आपके लिए ये सोचना और भी मुश्किल हो सकता है भविष्य में:
  • आपकी जिम्मेदारियां बढ़ जायेंगी यानी आपकी risk लेने की क्षमता घट जायेगी।
  • हो सकता ही आपकी salary बढ़ जाए और आप खुद को समझा लें। कि “चल भाई पैसे आ तो रहे हैं…अब और क्या चाहिए।”
कुछ लोग सोच सकते हैं कि lecture देना आसान है पर करना बहुत मुश्किल है। बात सच है, पर ये भी सच है कि ये करना मुश्किल ज़रूर है पर असंभव नहीं।
अगर Dheerubhai Ambani ने petrol pump की नौकरी नहीं छोड़ी होती तो क्या आज Reliance जैसी company होती? अगर Narayan Murthy ने Patni Computers की अपनी नौकरी नहीं छोड़ी होती तो क्या आज Infosys का कोई वजूद होता? Amitabh Bachchan ने भी पहले  Shaw Wallace और बाद में Bird & Co, नाम की  एक shipping firm में काम किया, अगर उन्होंने भी अपने दिल कि आवाज़ नहीं सुनी होती तो भला भारत को कहाँ मिलता इतना बड़ा महानायक?
ये बहुत बड़े-बड़े उदाहरण हैं, जिन्हें हम सब जानते हैं पर यकीन जानिए कि ऐसी हजारों success stories हैं, जहाँ पर लोगों ने अपनी सोच को हकीकत में बदल कर दिखाया है…गांव की गलियों से निकल कर शहर की बुलंदियों को अपना बनया है। खुद बने हैं करोड़पति और कईयों को लखपति बनाया है।
पर अभी भी हमारा जो पहला सवाल था कि “पर नौकरी छोडें कैसे?वो वहीँ का वहीँ बना हुआ है। कहने की बात नहीं है कि ये एक एक बहुत ही बड़ा step है, और बस यूँहीं नहीं लिया जा सकता है। इस क्रांतिकारी कदम को वही उठा सकता है जिसके मन में कुछ अपना करने की तीव्र इच्छा हो और वो अपने plan  को execute करने के लिए बहुत ज्यादा passionate हो। जिनके अंदर वाकई में कुछ कर गुजरने की दीवानगी होती है, वो इधर-उधर की बातें ज्यादा नहीं सोचते और बस लग जाते हैं अपने प्रयासों में।
पर हममें  से ज्यादातर लोग (including me) कुछ करना तो चाहते हैं, पर हमारे अंदर एक डर सा लगा होता है कि कहीं हम fail  हो गए तो जो है वो भी चला जायेगा। ये डर वाजिब भी है। इसीलिए मेरी समझ से एक बीच का रास्ता निकालना अच्छा साबित हो सकता है, जैसे कि कोई Side-Business शुरू कर के। ये एक पुराना अजमाया हुआ तरीका है, जो आपने अपने आस-पास देखा भी होगा। Office timing के बाद और छुट्टी के दिनों में लोग अपने साइड-बिजनेस को करते हैं और जब धीरे-धीरे बिजनेस ट्रैक पर आ जाता है तो अपनी नौकरी छोड़ कर पूरा समय business  में लगाते हैं। एक छोटा सा उदहारण देना चाहूँगा
N Mahadevan के अंदर एक Hotelier बनने की चाहत थी पर भाग्य ने उन्हें एक Professor बना दिया था, पर उन्होंने भाग्य के इस फैसले को चुनौती दी और Madras University में अपनी Professor की prestigious job छोड़ कर उन्होंने multi-million dollar Food Empire खड़ा कर दिया।
सुबह 9 बजे से शाम को 4:30 बजे तक पढाने के बाद इन्होने काम समझने के लिए एक और जॉब पकड़ ली, वो रोजाना शाम 6 से रात 12 बजे तक एक hotel में duty  करने लगे। जब काम समझ आ गया और कुछ पैसे इकठ्ठा हो गए तो उन्होंने खुद का एक Chinese restaurant शुरू कर दिया।आज उनके restaurants 16 देशों में हैं, जिनमे कुल 3000 employee  काम करते हैं। इन्होने खुद तो MBA  नहीं किया है पर IIM-Ahmedabad से pass-out बन्दों को business सँभालने के लिए रखा हुआ है।

Meet India's new president Ram Nath Kovind

1. Born on October 1, 1945, in Uttar Pradesh's Kanpur Dehat, Ram Nath Kovind was the youngest among three brothers. After graduating in law from a Kanpur college, Kovind had gone to Delhi to prepare for the Indian Administrative Services. He failed to pass it twice but made it in third attempt. He, however, did not join as he was selected for the allied services and started practising the law. 

2. He entered politics in 1994 when he became a member of Parliament in Rajya Sabha from Uttar Pradesh and served as an MP for two consecutive terms till 2006. 

3. Married to Savita Kovind, Ram Nath Kovind has a son Prashant Kumar, and a daughter, Swati. 

4. Kovind, an advocate by profession, used to practice in Supreme Court and Delhi High Court. 


5. He had represented India in the United Nations in New York and addressed United Nations General Assembly in October 2002. 

6. In 1977, Kovind had worked as the private secretary of then Prime Minister Morarji Desai. Later Kovind had also served as national spokesperson of BJP. 

7 . On August 8, 2015, Kovind was appointed governor of Bihar. 

8. He is a former President of the BJP Dalit Morcha (1998-2002) and President of the All-India Koli Samaj as well as the SC/ST  .. 

9. Kovind served as a member of the Board of Management of Dr. BR Ambedkar University, Lucknow. He was also a member of the Board of Governors of Indian Institute of Management, Kolkata. 

10. He had donated his ancestral house in his native village in Kanpur as baraatghar or community house to the village. 

Business related content से आपका क्या मतलब है ?

बिजनेस अपने आप में बहुत wide subject है। Future में मैं इस subject के under आने वाली कोई भी चीज share कर सकता हूँ but for the time being मेरा focus इस पर होगा कि कोई business practically किया कैसे जाता है और अगर किसी को इसे शुरू करना है तो उसे क्या-क्या करना होगा ?
For example: अगर किसी को चाय की दुकान खोलनी है तो मेरी कोशिश होगी कि मैं बता पाऊं :
  •  इसमें कितना खर्च आएगा
  •  क्या-क्या सामान लगेगा
  •  क्या-क्या challenges आ सकते हैं ?
  •  कमाई कितनी हो सकती है
  •  इस बिजनेस में सफलता पाने के टिप्स
  •  इत्यादि
कोई भी बिजनेस शुरुआत में छोटा हो सकता है पर वो छोटा ही रहे ऐसा ज़रूरी नहीं है। अगर खोजें तो आपके शहर में ही चाय बेचकर महीने का लाखों कमाने वाले मिल जायेंगे।
मैंने फिलहाल छोटे और मझले साइज़ के बिजनेस जो कुछ सौ से कुछ लाख तक रुपये लगा कर शुरू किये जा सकें के बारे में बताने के लिए सोचा है इसलिए ऐसा ही एक्जाम्पल लिया है।
इसका purpose क्या है ?
किसी भी समय में इंसान को ideally वो काम करना चाहिए जो उसे सबसे महत्त्वपूर्ण लगे और साथ ही उस काम को करने की उसके अन्दर क्षमता हो। मुझे लगता है कि अगर मैं बिजनेस से related बातें लोगों से शेयर करूँ तो बहुत से लोग जो सिर्फ अपना बिजनेस शुरू करने की सोचते हैं वाकई में अपना बिजनेस शुरू कर पायेंगे।
मैं भविष्य देखता हूँ, मैं देखता हूँ कि मेरे इस काम से मेरी लाइफ में और मेरे मरने के बाद भी लाखों entrepreneurs पैदा हो पायेंगे। और इन लाखों entrepreneurs द्वारा करोड़ों jobs create होंगी और लोगों के हाथ में पैसे आयेंगे।
मैंने गरीबी नहीं देखी पर गरीब होने का दर्द महसूस ज़रूर कर सकता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मैं कुछ ऐसा करूँ कि जो गरीब हैं वो अमीर बनें….और मुझे लगता है यदि मैं छोटे-छोटे businesses के बारे में बताऊंगा तो बहुत से लोग जो आज 10-10 घंटे काम करके मुश्किल से अपना और परिवार का खर्चा चला पाते हैं एक सफल बिजनेसमैन बन पायेंगे और एक अच्छी ज़िन्दगी जी पायेंगे।

Saturday, July 29, 2017

फ़ोन के कैमरे के कुछ जरुरी उपयोग जानिए

Smartphones ने हमारी life को सही मायने में एकदम से change कर दिया है और चीज़े इस कदर  fast हो गयी है सोचके लगता है आज से कुछ ही साल पहले तक ही हम कैसे थे …Girlfriend को love letter दिया करते थे और अगर एक दूसरे को देखने की बात हो तो वो सच में इतना आसान तो कभी नहीं था जितना आज हम हर moment यंहा तक कि नहाते धोते भी अपने special some1 के साथ  moments share कर सकते है  | और बस कुछ ही सालों में communication का जरिया ही बदल गया है  तो चलिए  कुछ और तरीके जानते है कि आप smartphone से फोटो लेने के साथ साथ इसके photo feature का इस तरह से advantage ले सकते है 
पासपोर्ट / Passport – पासपोर्ट एक सबसे अहम् पहचान और पते के प्रमाण के लिए काम में आने वाले दस्तावेजो में से है क्योंकि एक तो यह आपके भारतीय नागरिक होने का प्रमाण है आर दूसरा यह कई तरह के वेरिफिकेशन process के पूरा होने के बाद बनता है इसलिए आप इसे पहचान के प्रमाण के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते है |  ऐसे में एक सबसे अच्छी आदत ये है आप इसकी mobile phone camera में फोटो लेकर अपने फोल्डर में सेव करके रखें ताकि कभी किसी भी आपातकाल के समय आप कम से कम अपने पासपोर्ट के सीरियल नंबर और कुछ अन्य जानकरी देकर अगर आपका पासपोर्ट विदेश में रहते हुए कंही खो जाए तो पुलिस की मदद तो कर सकतीं है | इस से किसी भी समस्या से बाहर निकलने में आपको लगने वाला समय कम हो जायेगा क्योंकि वेरिफिकेशन में लगने वाला समय भी कम हो जाता है |driving license – यह भी  पासपोर्ट जितना महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन फिर भी किसी भी साधन को ड्राइव करने के लिए आपको इसकी जरुरत पडती है और मुख्यत: ऐसा देखा गया है अधिकतर लोग सबसे अधिक पहचान के प्रमाण के तौर पर DL का ही इस्तेमाल करते है और अगर आप ट्रेन टिकेट या किसी तरह के कोई online या offline फॉर्म्स भरते है तो आप बड़े आम से पहचान और पते के प्रमाण के लिए इस्तेमाल कर सकते है और आपको चाहिए इसकी भी एक soft copy अपने mobile phone camera में लेकर रखें |  
कीमती चीज़े –  जब भी आप कोई branded या कोई ऐसा सामान लेते है जो आपके लिए बहुत जरुरी होने के साथ साथ महंगा भी हो और अपने इसका insurance भी करवाया हुआ हो तो ऐसे में आपको चाहिए कि आप अपने उस सामान की फोटो भी अपने mobile phone camera में लेकर रखें ताकि किसी भी चोरी वोरी की घटना होने पर आप पुलिस को उस चीज़ के बारे में ठीक ठीक जानकारी तो दें सकते है | उन पर सीरियल नंबर भी लिखा होता है और महंगी चीजों में तो यह अक्सर unique होता है ऐसे में आप उसके serial number वाली side को अपने फ़ोन कैमरा में कैद  कर सकते है |
किराये का मकान – आप मकान ले रहे हो या छोड़ रहे हों दोनों दशा में अगर आप फ़ोन में उसकी फोटो पहले ले लेते है तो मकान को छोड़ते समय आपका इस बाद को लेकर विवाद नहीं होगा कि कमरे में अच्छा रंग था आपके आने के बाद आपने खराब कर दिया , जब अपने रूम लिया था तो इसमें फैन था | ऐसे ही कुछ तुचु मुचु सी परेशानियाँ आपको परेशान नहीं करेंगी |
Taxi में या ऑटो में बैठते time – देर रात को अगर आपको घर आने में देर हो जाती है और अगर आप लड़की है तो अपने workplace से ऑटो में या taxi में बैठे समय आप उसके आगे से उसकी एक फोटो mobile phone camera से लेकर अपने घरवालों या किसी भी अपने जानकार को सेंड करदें और साथ ही ऑटों में बैठने से पहले आप घर पर फ़ोन करके बता दें ताकि किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत action लिया जा सके |
विकल्प – documents को सही से online cloud में manage करने के लिए आपके पास भारतीय सरकार की और से एक और कमाल का और वो भी मुफ्त service दिया गया है जिसे Digilocker कहते है उसे setup करने के लिए आपको आधार  कार्ड  में पंजीयन करवाना जरुरी होता है या अगर आपका पहले से आधार कार्ड बना हुआ है तो आप अपना डिजिटल लाकर setup कर सकते है |

मुग़ल सम्राट अकबर महान क्यों है जानिए ?(Why is Akbar called the Great ? )

Akbar के बारे में great कहे जाने के पीछे जो चीजे हमे इतिहास में लिखी हुई मिलती है उनकी बात हम बात में करेंगे लेकिन पहले हम बात करते है कि akbar क्यों great नहीं था तो इस बारे में लोगो का कहना है कि इतिहास चूँकि उस जमाने में लिखा गया है जब वह राज कर रहा था तो इसका निष्पक्ष होना जरुरी नहीं है , हालाँकि यह ठीक बात है और दूसरी जो बात लोग कहते है वो ये कि वह भी एक सामान्य राजा था जिसमे एक राजा होने के तमाम दुर्गुण शामिल थे जो किसी भी बड़े राज्य के सत्तारूढ़ राजा में होते है जैसे कि वह बेहद कामुक , अय्याश था और उसके “हरम” में बहुत सी औरतें थी जिनकी संख्या करीब 5000 बताई जाती है जिन्हें वह अपने और अपने राज्य के कर्मचारियों के मनोरंजन के लिए रखता था | उसके अनुसार औरतें केवल ऑब्जेक्ट थी | अब अगर इस बात को समझे तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि सत्ता के साथ शराब और दूसरे तरह के नशे के अलावा जितना कुछ भी है जो हम आज के दौर में गलत मानते है वो सब पहले की संस्कृति का हिस्सा था भले ही वो गलत ही क्यों न हो और कुछ गिने चुने राजाओं की बात अगर नहीं करें तो करीब करीब सभी तरह के राजाओं ने अपने राजकाल में ऐश की है और अय्याशी की सारी हदें पार की है और राजनीति की बात करें तो यह सिलसिला आज भी जारी है | इसलिए हम इस बारे में सटीक सटीक कुछ भी नहीं कह सकते कभी भी कि जो history हमे पढने में आती है वह कितनी सच है या कितनी झूट है लेकिन हाँ जो जानकारी हमे इतिहास से मिलती है उस बारे में हम कुछ जानकारियां उस जमाने को समझने में उपयोग कर सकते है और इस आर्टिकल का मक़सद भी यही है हम यंहा akbar वाकई में great था या नहीं इस पर बहस के लिए यह आर्टिकल नहीं लिख रहे जबकि इतिहास में जो चीजे लिखी है उसे आसानी से उपलब्ध करवाने के नजरिये यह आर्टिकल लिखा गया है तो चलिए आगे बात करते है |
अब बात करते है कि इतिहास के अनुसार akbar क्यों great था तो उसके पक्ष में निम्न तर्क है जो history में देखने को मिलते है 
  • 1562 में अकबर ने युद्ध बंदियों को बंदी बनाये जाने और उनकी पत्नी और बच्चो को खुले मार्किट में नीलाम करने को निषेध कर दिया |
  • 1563 में उसने jaziya tax और  pilgrimage tax जैसे टैक्सेज को ख़त्म कर दिया जो गैर मुस्लिम लोगो पर लगाये जाने वाले टैक्स थे और इसलिए लगते थे कि वह लोग अपने पूजा पाठ के लिए पवित्र माने जाने वाले स्थानों पर जाते थे या एक से दूसरी जगह जाते थे उसने 1564 मे यह नियम बना दिया कि इसके लिए दूसरे नजरिये से टैक्स लगाया जायेगा कि कोई व्यक्ति कितना धनी है बजाय इसके कि धर्म के आधार पर टैक्स देना पड़े |
  • akbar पहला ऐसा शासक था जिसने अपने मंत्रिमंडल में हिन्दू लोगो को भी जगह दी थी और हिन्दुओ के लिए यह एक मौका था कि वह भी अपने राज्य के काम काज और उस से जुड़े फैसलों में अपनी भागीदारी दे सकते थे क्योंकि इस से पहले किसी भी मुग़ल साम्राज्य में ऐसी व्यवस्था नहीं थी कि हिन्दू किसी अच्छी रैंक के अधिकारी की पोस्ट पर काबिज हो सके |
  • ऐसा कहा जाता है कि अकबर ने अपने राज्य में बाल विवाह को बैन कर दिया था और लडकियों के लिए 14 साल और लड़कों के लिए 16 साल की उम्र निर्धारित थी |
  • अकबर ने marriage tax का प्रावधान किया ताकि बहुविवाह की प्रथा को कम से कम किया जा सके |
  • अकबर ने विधवा विवाह की प्रथा को भी बल दिया साथ ही उसने सती प्रथा भी को भी बैन कर दिया और सभी अधिकारियो को इस पर अमल करवाने के लिए बाध्य किया कि यह केवल एक ही स्थिति में होना चाहिए जब कोई औरत यह चाहती हो कि वह अपने पति के साथ सती होना चाहती है |
  • Akbar ने सिविल लॉ की अलग से व्याख्या की और इस तरह की व्यवस्था लागू की जिसमे सभी धर्म अपने अपने रीति रिवाजों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अपनी अपनी policy बना सकते थे |
  • Akbar ने हिन्दू धर्म के हिसाब से पवित्र माने जाने वाले दिनों पर मांस के बिकने पर भी पाबन्दी लगा दी ताकि दूसरे धर्म के लोगो की भावनाओं का भी ख्याल रखा जा सके |
  • उसने हिन्दू साहित्य का अनुवाद करवाने के लिए भी अलग से व्यवस्था की ताकि हिन्दुओं के रीति रिवाज को भी गहराई से समझा जा सके |
इसके अलावा बहुत से फैक्ट्स है जो यह दिखाते है कि अकबर अपने से पहले वाले मुग़ल शासकों से बहुत अलग था और उसके अपनी प्रजा के लिए बहुत ईमानदारी दिखाई जिसकी वजह से उसका साम्राज्य इतना फैला हुआ और इतना स्थायित्व लिए हुए था |
नोट – अधिकांश तथ्य इन्टरनेट से प्राप्त विभिन्न सूत्रो से लिए गये है इसलिए हम इनकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते है 

बदलाव

जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही basic ढंग से होती है | कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है |
एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |
वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |”  क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |
यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |
महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

सकारात्मक राजनीति से मंदिर का हल निकलेगा : योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सकारात्मक राजनीति से अयोध्या में मंदिर का हल निकलेगा. अयोध्या दौरे पर गए सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या ने देश को एक पहचान दी है. उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया दुनिया ऐसा देश है जहां की अधिकतम आबादी मुस्लिम है.

Ram Nath Kovind the 14th President of India.

Ram Nath Kovind, has become the 14th President of India.
The villagers talk about how difficult life was this dalit, how father Maikulal Kori eked out a living for his family of nine children by running a small grocery store, how “Ram Nath” learnt his first lessons under the ancient pipal tree, how sharp he was, how fast he learnt things and remembered those, how spiritual he was.
His old classmates still reminisce about the little boy reciting Ramayana and Gita at a tender age; that they all walked barefoot eight km every day to attend high school in a village nearby. Unlike many of his mates, “Ram Nath” had gone to Kanpur to pursue higher studies and eventually to practice law in Delhi in the 1970s.
By the time he became personal assistant to former Prime Minister Morarji Desai in the late ’70s, the village had realised that they had a star in their midst. When in 1994, he became a Rajya Sabha MP, they had stopped being surprised.
The rest is history: Ram Nath Kovind developed Paraunkh into a "model village", using MP funds — paved roads, high school for girls, a State Bank of India branch, electricity meters in every house — even donating his ancestral home to the village.
Prime Minister Modi had to diffuse the confusion through a series of tweets: “Shri Ram Nath Kovind, a farmer’s son, comes from a humble background. He devoted his life to public service & worked for poor & marginalised.” “With his illustrious background in the legal arena, Shri Kovind’s knowledge and understanding of the Constitution will benefit the nation.” “I am sure Shri Ram Nath Kovind will make an exceptional President & continue to be a strong voice for the poor, downtrodden & marginalised.”

Competitive Exams

Who among the following is associated with Bardoli satyagraha?
  • A.
    K. ka Kalelkar
  • C.
    Sardar Patel
  • B.
    Vinoba Bhave
  • D.
    Mahatma Gandhi




Gandhiji believed that satyagraha is a weapon of �
  • A.
    The Poor
  • C.
    The untouchables
  • B.
    The Weak
  • D.
    None of these



In the year 1905, Gopal Krishna Gokhale founded the �
  • A.
    Servants of India society
  • C.
    Brahmo samaj
  • B.
    Asiatic society
  • D.
    Bharat sewak samaj



The British Prime Minister who declared his Communal Award Scheme to India in 1932 was �
  • A.
    Winston Churchill
  • C.
    Ramsay McDonald
  • B.
    Clement Attlee
  • D.
    Nerille Chamberlain



ANS C,D,A,C



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सीधी बिक्री ( डायरेक्ट मार्केटिंग) लाखों रुपये महीना कमाने का बिज़नेस ।

डायरेक्ट सेलिंग या मल्टीलेवल मार्केटिंग आज के युग में बढ़ती हुई इंडस्ट्री है ।आज आप किसी क्षेत्र में देख लो आपको कोई भी जॉब या कारोबार नहीं ...