Thursday, September 13, 2018

सीधी बिक्री ( डायरेक्ट मार्केटिंग) लाखों रुपये महीना कमाने का बिज़नेस ।

डायरेक्ट सेलिंग या मल्टीलेवल मार्केटिंग आज के युग में बढ़ती हुई इंडस्ट्री है ।आज आप किसी क्षेत्र में देख लो आपको कोई भी जॉब या कारोबार नहीं मिलेगा जिसमें आप यह कह सको कि मेरी पहचान का एक मेरा फ्रेंड या रिस्तेदार है जो महीना लाखों रुपये कमाता है ।अगर कोई है भी तो वह इतना व्यस्त है अपने काम में कि वो कहीं आ जा नहीं सकता और न ही अपने बिज़नेस की वजह से अपने परिवार को उचित समय दे पा रहा है ।
आज हम कोई भी बिज़नेस कर रहे है या कोई नौकरी कर रहे है आप दावे से नहीं कह सकते कि जिस तरह महंगाई बढ़ रही है उसी के हिसाब से आपकी इनकम भी बढ़ेगी
नेटवर्क मार्केटिंग एक ऐसा बिज़नेस है जो न केवल आपको आर्थिक तौर पर आज़ाद करता है बल्कि आपको समय भी खूब देता है इस बिज़नेस की खास बात यह है कि इस बिज़नेस में आप जितना जयादा समय शुरू में आप लगाओगे आपका बिज़नेस बढ़ता जायेगा और आपकी व्यस्तता कम होती जाएगी ।

Tuesday, February 13, 2018

आज का युवा और नौकरी की आस ।

हमने अक्सर सुना है कि भारत एक आमिर देश है पर यहाँ रहने वाले गरीब लोग है ।हमने यह भी सुना है कि भारत कभी सोने कि चिड़िया हुआ करता था। यहाँ दूध दही की नदिया बहती थी ।फिर ऐसा क्या हुआ कि इस देश के लोग गरीब बनकर रह गए।
इस प्रश्न के उत्तर में हम तरह तरह के उत्तर दे सकते है जैसे कि भरष्टाचार ,विदेशी बैंकों में जमा या देश में ही छुपा कर रक्खा गया काला धन या फिर कोई और कारन भी गिनवा सकते है ।जबकि सच्चाई यह नहीं है।सच्चाई यह है कि इसके लिए हम खुद उत्तरदायी है ।यह जानकारी चौंका देने वाली है कि भारत जैसे बड़े देश में केवल 3 प्रतिशत लोग ही ऐसे है जो सम्मानजनक कमाई कर रहे है इसका अर्थ यह है कि यह 3 प्रतिशत लोग ही अपना income tax भरते है ।वित्तमत्रालय कि रिपोर्ट बताती है कि इन 3 प्रतिषत लोगों में भी 89 प्रतिशत लोग ऐसे है जिनकी वार्षिक आये 5 लाख रूपये से कम है ।अभी आप खुद सोच सकते है कि भारत के लोग कितना कमाते है । देश कि अधिकांश जनता पुरानी परम्परा को आज भी निभा रहे है जिसमें एक कमाता है और बाकी सब बैठ कर खाते है इस लिए देश आज इतना कर्ज़दार हो गया कि यहाँ पैदा होने वाला हर बच्चा 33 हजार का कर्ज़दार होता है वहीँ जापान जैसा छोटा सा देश जहाँ पर प्राकर्तिक आपदाये आती ही रहती है वो देश फिर वैसे का वैसा बन जाता क्योंकि वहां बड़ों से लेकर बच्चे तक सभी कमाते है जापानी लोग कहते है कि अगर   उनसे सब कुछ छीन लिया जाये तो वो 6 महीनों के अंदर सब कुछ वापिस पालेंगे ।
भारत में आज भी अधिकांश लोगों कि मानसिकता यह है कि औरतों को केवल घर में रह कर घर के काम करना चाहिए और अपना घर संभालना चाहिए और बच्चे केवल पढ़ने के लिए होते है तो युवा केवल नौकरी करने के लायक होते है हर माता पिता अपने बच्चे को अपना सब ककुछ लूटा कर पढ़ाते है तांकि उसको एक अच्छी नौकरी मिल जाये और उसकी ज़िंदगी का गुजरा हो जाये ।

Friday, December 15, 2017

संभालना सीख लो, सब कुछ मिलेगा

आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग अपनी मेहनत (Hard work) के बल पर अमीर (Rich) बन जाते हैं और समय के साथ उनके पास पैसा (Money) लगातार बढ़ता चला जाता है जबकि कुछ लोग मेहनत करने के बाद भी गरीब ही रह जाते हैं और वह कभी अपनी गरीबी से पीछा नहीं छुड़ा पाते, ऐसा क्यों होता है?जबकि ऐसे भी लोग होते हैं जो उतने ही समय में अपने सभी काम भी करते हैं और समय को बचाकर अन्य जरुरी कार्य भी करते है, कभी समय कम होने का रोना नहीं रोते और वह अपनी लाइफ में सफल भी हैं। ऐसा क्यों होता है?साथ ही आपने ऐसे लोगों को भी देखा होगा जो कहते हैं कि “हम बहुत busy हैं, हमारे पास time की बहुत कमी है, बहुत से जरुरी कार्यों के लिए भी हमारे पास समय नहीं है।” लेकिन वह इतना busy रहने के बाद भी सफल (successful) नहीं कहे जा सकते।
दोनों प्रकार के लोगों में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
ध्यान रखिये यह समस्या हमारी और आपकी ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है जिसका उत्तर जानना बहुत जरुरी है।
बहुत से लोग अपने अपने तरीके से इन प्रश्नों के उत्तर देते हैं और इसके पीछे बहुत से कारण बताते हैं। लेकिन यहाँ मैं वह कारण या उत्तर बताने जा रहा हूँ जो मुझे समझ आता है।
जिस चीज को हम सही से संभालना अर्थात मैनेज करना सीख लेते हैं वह चीज समय के साथ लगातार बढ़ती चली जाती है।
अब वह चाहें money को manage करना हो या time को manage करना हो। चाहें वह आपके social relations हों या अपनी family के लिए आपका प्यार हो। कुछ भी हो, यदि आप चीजों को मैनेज करना सीख गए तो समझ लो आपको कोई सफल होने से नहीं रोक सकता।
Money के बारे में आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी Money को किस तरह manage करते हैं अर्थात किस तरह आप money earn करते हैं, किस तरह money saving करते हैं और किस तरह money investing करते हैं।
अगर इनको आपने मैनेज कर लिया तो आपको Millionaire बनने से कोई नहीं रोक सकता।
यही बात Time पर भी लागू होती है। दुनिया में सभी को एक दिन में 24 घंटे ही मिलते हैं। सफल वही होता है जो Time Management के द्वारा समय को सही से मैनेज करना सीख जाता है।
यहाँ जरुरी बात यह भी है कि हम जिस चीज को भी मैनेज करना सीखें उसको मैनेज करने का तरीका हम खुद सोचें और उसे practically अपनी life में apply करें तो उस चीज को हम बहुत अच्छी तरह सीख पाते हैं।

Friday, October 6, 2017

How many words are there in the English language?

About a million, may be more.
it is difficult to calculate the exact number of words.If we calculate  all of scientific nomenclature this could easily double the figure. 

vowel

vowel
A spoken sound made with the mouth open and without the tongue touching the roof of the mouth, teeth, etc. In English, vowels are represented by the letters aei, o, and u. Compare with consonant.

Verb

verb
A word that describes what a person or thing does, or what happens, for example run, sing, grow, occur, seem. Learn more about verbs.

verbal noun
The present participle of a verb when it’s used as a noun (e.g. 'smoking' in smoking is strictly forbidden). Also called gerund.

Types of noun

Common noun

A common noun is a noun that refers to people or things in general, e.g. boy, country, bridge, city, birth, day, happiness.

Proper noun

A proper noun is a name that identifies a particular person, place, or thing, e.g. Steven, Africa, London, Monday. In written English, proper nouns begin with capital letters.

Concrete noun

A concrete noun is a noun which refers to people and to things that exist physically and can be seen, touched, smelled, heard, or tasted. Examples include dog, building, coffee, tree, rain, beach, tune.

Abstract noun

An abstract noun is a noun which refers to ideas, qualities, and conditions - things that cannot be seen or touched and things which have no physical reality, e.g. truth, danger, happiness, time, friendship, humor.

Collective nouns

Collective nouns refer to groups of people or things, e.g. audience, family, government, team, jury. In American English, most collective nouns are treated as singular, with a singular verb:
The whole family was at the table.
In British English, the preceding sentence would be correct, but it would also be correct to treat the collective noun as a plural, with a plural verb:
The whole family were at the table.
 For more information about this, see matching verbs to collective nouns.
 A noun may belong to more than one category. For example, happiness is both a common noun and an abstract noun, while Mount Everest is both a concrete noun and a proper noun.

Count and mass nouns

Nouns can be either countable or uncountable. Countable nouns (or count nouns) are those that refer to something that can be counted. Uncountable nouns (or mass nouns) do not typically refer to things that can be counted and so they do not regularly have a plural form.

सीधी बिक्री ( डायरेक्ट मार्केटिंग) लाखों रुपये महीना कमाने का बिज़नेस ।

डायरेक्ट सेलिंग या मल्टीलेवल मार्केटिंग आज के युग में बढ़ती हुई इंडस्ट्री है ।आज आप किसी क्षेत्र में देख लो आपको कोई भी जॉब या कारोबार नहीं ...