भारत में 60 प्रतिशत से अधिक तंबाकू का सेवन करने वाले लोग ये जानते हैं कि इससे कैंसर, दिल का दौरा, स्ट्रोक, आस्थमा इत्यादि रोग हो सकते हैं फिर भी तंबाकू की लत छोड़ने की दर 10 प्रतिशत से भी कम है। हम अक्सर देखते हैं की तंबाकू विक्रेता ने अपनी दुकान पर बड़े – बड़े शब्दों में लिखकर लगाया होता है कि
(तंबाकू से कैंसर होता है।)
फिर भी तंबाकू उत्पाद खरीदते वक्त हम इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं। इसके इलावा सरकार द्वारा की गई पहल के अंतर्गत तंबाकू उत्पादों पर सहचित्र सहित सेहत चेतावनी का आकार भी 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 85 प्रतिशत कर दिया गया है ताकि लोगो को तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति चेताया जा सके। हालांकि इन सब बातों का तंबाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है और वो अपनी इस आदत को छोड़ने का प्रयास भी करता है या इसका इस्तेमाल कम कर देता है परन्तु ये स्थति कुछ ही समय के लिए रह पाती है।
तंबाकू की लत के कारण ऐसी बहुत सी धारणाएं जो की हमें फिर से इसका इस्तेमाल करने के लिए उकसा देती हैं, जैसे कि-
- मैं तंबाकू सेवन तो करता हूँ परन्तु मैं साथ में पोष्टिक आहार भी लेता हूँ इसलिए मुझे कैंसर नहीं हो सकता।
- मैं तो कभी-कभी इसका सेवन करता हूँ कैंसर तो उन्हें होता होता है जो प्रतिदिन इसका प्रयोग करते हैं।
- तंबाकू का सेवन छोड़ने के बाद मैं बीमार और सुस्त महसूस करता हूँ या करती हूँ।
- मेंरे बाप-दादा भी तो कब से इसका सेवन कर रहे हैं अगर उनको कुछ नहीं हुआ तो मुझे भी कुछ नहीं होगा।
परन्तु वो ये भूल जाते हैं कि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो जवानी में ही तंबाकू से होने वाले रोगों के कारण मारे गए। इसलिए आज वो ये बात नहीं बता सकते की उनकी मृत्यु का कारण तंबाकू है।
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