Friday, December 15, 2017

संभालना सीख लो, सब कुछ मिलेगा

आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग अपनी मेहनत (Hard work) के बल पर अमीर (Rich) बन जाते हैं और समय के साथ उनके पास पैसा (Money) लगातार बढ़ता चला जाता है जबकि कुछ लोग मेहनत करने के बाद भी गरीब ही रह जाते हैं और वह कभी अपनी गरीबी से पीछा नहीं छुड़ा पाते, ऐसा क्यों होता है?जबकि ऐसे भी लोग होते हैं जो उतने ही समय में अपने सभी काम भी करते हैं और समय को बचाकर अन्य जरुरी कार्य भी करते है, कभी समय कम होने का रोना नहीं रोते और वह अपनी लाइफ में सफल भी हैं। ऐसा क्यों होता है?साथ ही आपने ऐसे लोगों को भी देखा होगा जो कहते हैं कि “हम बहुत busy हैं, हमारे पास time की बहुत कमी है, बहुत से जरुरी कार्यों के लिए भी हमारे पास समय नहीं है।” लेकिन वह इतना busy रहने के बाद भी सफल (successful) नहीं कहे जा सकते।
दोनों प्रकार के लोगों में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
ध्यान रखिये यह समस्या हमारी और आपकी ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है जिसका उत्तर जानना बहुत जरुरी है।
बहुत से लोग अपने अपने तरीके से इन प्रश्नों के उत्तर देते हैं और इसके पीछे बहुत से कारण बताते हैं। लेकिन यहाँ मैं वह कारण या उत्तर बताने जा रहा हूँ जो मुझे समझ आता है।
जिस चीज को हम सही से संभालना अर्थात मैनेज करना सीख लेते हैं वह चीज समय के साथ लगातार बढ़ती चली जाती है।
अब वह चाहें money को manage करना हो या time को manage करना हो। चाहें वह आपके social relations हों या अपनी family के लिए आपका प्यार हो। कुछ भी हो, यदि आप चीजों को मैनेज करना सीख गए तो समझ लो आपको कोई सफल होने से नहीं रोक सकता।
Money के बारे में आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी Money को किस तरह manage करते हैं अर्थात किस तरह आप money earn करते हैं, किस तरह money saving करते हैं और किस तरह money investing करते हैं।
अगर इनको आपने मैनेज कर लिया तो आपको Millionaire बनने से कोई नहीं रोक सकता।
यही बात Time पर भी लागू होती है। दुनिया में सभी को एक दिन में 24 घंटे ही मिलते हैं। सफल वही होता है जो Time Management के द्वारा समय को सही से मैनेज करना सीख जाता है।
यहाँ जरुरी बात यह भी है कि हम जिस चीज को भी मैनेज करना सीखें उसको मैनेज करने का तरीका हम खुद सोचें और उसे practically अपनी life में apply करें तो उस चीज को हम बहुत अच्छी तरह सीख पाते हैं।

Friday, October 6, 2017

How many words are there in the English language?

About a million, may be more.
it is difficult to calculate the exact number of words.If we calculate  all of scientific nomenclature this could easily double the figure. 

vowel

vowel
A spoken sound made with the mouth open and without the tongue touching the roof of the mouth, teeth, etc. In English, vowels are represented by the letters aei, o, and u. Compare with consonant.

Verb

verb
A word that describes what a person or thing does, or what happens, for example run, sing, grow, occur, seem. Learn more about verbs.

verbal noun
The present participle of a verb when it’s used as a noun (e.g. 'smoking' in smoking is strictly forbidden). Also called gerund.

Types of noun

Common noun

A common noun is a noun that refers to people or things in general, e.g. boy, country, bridge, city, birth, day, happiness.

Proper noun

A proper noun is a name that identifies a particular person, place, or thing, e.g. Steven, Africa, London, Monday. In written English, proper nouns begin with capital letters.

Concrete noun

A concrete noun is a noun which refers to people and to things that exist physically and can be seen, touched, smelled, heard, or tasted. Examples include dog, building, coffee, tree, rain, beach, tune.

Abstract noun

An abstract noun is a noun which refers to ideas, qualities, and conditions - things that cannot be seen or touched and things which have no physical reality, e.g. truth, danger, happiness, time, friendship, humor.

Collective nouns

Collective nouns refer to groups of people or things, e.g. audience, family, government, team, jury. In American English, most collective nouns are treated as singular, with a singular verb:
The whole family was at the table.
In British English, the preceding sentence would be correct, but it would also be correct to treat the collective noun as a plural, with a plural verb:
The whole family were at the table.
 For more information about this, see matching verbs to collective nouns.
 A noun may belong to more than one category. For example, happiness is both a common noun and an abstract noun, while Mount Everest is both a concrete noun and a proper noun.

Count and mass nouns

Nouns can be either countable or uncountable. Countable nouns (or count nouns) are those that refer to something that can be counted. Uncountable nouns (or mass nouns) do not typically refer to things that can be counted and so they do not regularly have a plural form.

Thursday, October 5, 2017

What is a sentence?

sentence is the basic grammatical unit. It contains a group of words and expresses a complete thought. A sentence consists of a subject and a predicate.

For example in the sentence "Bill writes good poems" Bill is the subject of the sentence and writes good poems is the predicate.

Word क्या होता है ?

Letters को आपस में मिलकर लिखने से उनमें कोई अर्थ निकले तो उसे word कहते है एक word बनाने के लिए कम से कम एक स्वर और एक व्यंजन का होना आवश्यक है ।स्वर न होने पर अवर की धवनि वाले व्यंजन के होना आवशयक होता है 

Sunday, August 13, 2017

विज्ञान की अमर विभूति सर जगदीश चंद्र बसु

पेङ पौधौं से संबन्धित सवालों की जिज्ञासा बचपन से लिए, धार्मिक वातावरण में पले, जिज्ञासु जगदीश चंद्र बसु का जन्म 30 नवंबर, 1858 को बिक्रमपुर हुआ था, जो अब ढाका , बांग्लादेश का हिस्सा था । आपके पिता श्री भगवान सिंह बसु डिप्टी कलेक्टर थे।
उस दौर में अफसर लोग अपने बच्चे को अंग्रेजी स्कूल में ही पढाकर अफसर बनाना चाहते थे। परन्तु पिता श्री भगवान सिंह बसु अपने बेटे को अफसर नही बल्की सच्चा देश सेवक बनाना चाहते थे। इसलिए जगदीशचंद्र बसु को पास के स्कूल में दाखिला दिला दिया गया, वहाँ अधिकतर किसानों और मछुवारों के बच्चे पढते थे। वे पढाई भी करते थे, साथ-साथ खेती और दूसरे कामों में अपने घर वालों का हाँथ भी बँटाते थे। उन बच्चों के साथ रहकर बसु ने जीवन की वास्तविक शिक्षा को अपनाया। वहीं उन्हे शारीरिक श्रम करने की प्रेरणा मिली। सबको समान समझने की भावना पैदा हुई, मातृभाषा से प्रेम भी हो गया।
पेङ-पौधों के बारे में जब उनके सवालों का उत्तर बचपन में स्पष्ट नही मिला तो वे बङे होने पर उनकी खोज में लग गये। बचपन के प्रश्न जैसेः- माँ पेङ के पत्ते तोङने से क्यों रोकती थी? रात को उनके नीचे जाने से क्यों रोकती थी? अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति के कारण आगे चलकर उन्होंने अपनी खोजों से पूरे संसार को चकित कर दिया।
लंदन से रसायन शास्त्र और वनस्पति शास्त्र में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात भारत वापस आ गये। कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में भौतिकी विज्ञान के अध्यापक बने। कॉलेज में उस समय अधिकतर अंग्रेज शिक्षक ही थे। प्रिंसीपल भी अंग्रेज थे। वहाँ भारतियों के साथ भेदभाव बरता जाता था। समान कार्य हेतु अंग्रेजों के मुकाबले भारतीयों को कम वेतन दिया जाता था। बचपन से ही उन्होने अपने देश और जाति के स्वाभिमान को समझा था अतः उन्होने इस अन्याय का डटकर सामना किया। भारतियों को कम वेतन देने का कारण ये भी था कि उन्हे विज्ञान की पढाई के योग्य नही समझा जाता था।
जगदीश चंद्र बसु के विरोध जताने पर वहाँ के प्रिंसिपल ने उनका वेतन और कम कर दिया, जिसे बसु ने लेने से इंकार कर दिया। बगैर वेतन के वे अपना काम करते रहे। आर्थिक तंगी के कारण उन्हे अनेक परेशानियों का सामना करना पङा किन्तु वे धैर्य के साथ अपनी बात पर अङे रहे। परिणाम स्वरूप उन्हे उनके स्वाभीमान का उचित फल मिला। उनकी ढृणता के आगे कॉलेज वालों को झुकना पङा। वे अन्य भारतियों को भी पूरा वेतन देने को तैयार हो गये। जगदीशचंद्र बसु की नौकरी भी पक्की कर दी गई तथा उनका बकाया वेतन भी उन्हे मिल गया।
बसु पढाने के बाद अपना शेष समय वैज्ञानिक प्रयोग में लगाते थे। उन्होने ऐसे यंत्रो का आविष्कार किया जिससे बिना तार के संदेश भेजा जा सकता था। उनके इसी प्रयोग के आधार पर आज के रेडियो काम करते हैं। जगदीशचंद्र बसु ही बेतार के तार के वास्तविक आविष्कारक हैं परंतु परिस्थिति वश इसका श्रेय उन्हे नही मिल सका।
बसु हार मानने वाले इंसान नही थे, उन्होने पेङ-पौधों पर अध्यन करना शुरु किया वैसे भी इसमें तो उनकी बचपन से जिज्ञासा थी। पेङ-पौधों पर की गई खोज उनके लिए वरदान सिद्ध हुई। उनकी खोज ने ये सिद्ध कर दिया कि पौधे भी सजीवों के समान सांस लेते हैं, सोते जागते हैं और उन पर भी सुख-दुख का असर होता है। उन्होने ऐसा यंत्र बनाया, जिससे पेङ-पौधों की गति अपने आप लिखी जाती थी।इस यंत्र को क्रेस्कोग्राफ (crescograph) कहा जाता है । लंदन स्थित रॉयल सोसाइटी ने उनके आविष्कार को एक अद्भुत खोज कहा और उन्हे रॉयल सोसाइटी का सदस्य भी मनोनित कर लिया।
इसी खोज को प्रदर्शित करते समय उनके साथ बहुत ही मजेदार घटना घटी। पेरिस में उन्हे पौधों पर तरह-तरह के जहरों का असर दिखाना था। उन्होने एक पौधे पर पोटेशीयम साइनाइड का प्रयोग किया किन्तु पौधा मुरझाने की बजाय और अधिक खिल उठा। पोटेशिय साइनाइड बहुत तेज किस्म का जहर होता है। उसका पौधे पर उलटा असर देख कर उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होने उसे चखा तो वो चीनी थी। वहीं वो कैमिस्ट भी था जिससे पोटेशियम साइनाइड उन्होने मँगाया था। कैमिस्ट ने कहा कि “कल मेरे पास एक नौकर पोटेशियम साइनाइड लेने आया था, मैने सोचा कहीं ये आत्महत्या न कर ले अतः मैने इसे चीनी का पाउडर दे दिया था।“
जगदीशचंद्र बसु निरंतर नई खोज करते रहे, 1915 में उन्होने कॉलेज से अवकाश लेकर लगभग दो साल बाद “बोस इन्स्ट्यूट” की स्थापना की। जो ‘बोस विज्ञान मंदिर’ के नाम से प्रख्यात है। 1917 में सरकार ने उन्हे सर की उपाधी से सम्मानित किया।
सर जगदीश चंद्र बसु केवल महान वैज्ञानिक ही नही थे, वे बंगला भाषा के अच्छे लेखक और कुशल वक्ता भी थे। विज्ञान तो उनके सांसो में बसता था। 23 नवंबर, 1937 को विज्ञान की ये विभूति इह लोक छोङ कर परलोक सीधार गई। आज भी वैज्ञानिक जगत में भारत का गौरव बढाने वाले सर जगदीसचन्द्र बसु का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है। ऐसी विभूतियाँ सदैव अमर रहती हैं।

इंदिरा गाँधी

इंदिरा गाँधी जी का जनम 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में आनंद भवन में एक ऐसी महान विभूती का जन्म हुआ जिसने न केवल भारतीय राजनीति को नये आयाम दिये बल्कि विश्व राजनीति के क्षितिज पर भी एक युग बनकर छाई रहीं।
रवीन्द्रनाथ टैगोर की “प्रियदर्शिनी”, नेहरु की इंदिरा, मोरार जी देसाई की गुंगी गुङिया, दृढ़निश्चयी और किसी भी तरह की परिस्थिति से जूझने और जीतने की क्षमता रखने वाली शक्तीशाली महिला श्रीमति इंदिरा गाँधी भारत की पहली एवं अब तक की एक मात्र महिला प्रधानमंत्री हैं।
अपने दृढ निश्चय, साहस और निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता के कारण इंदिरा गांधी को विश्व राजनीति में लौह महिला के रूप में जाना जाता है लेकिन बचपन में उन्हें भी आम बच्चों की तरह अंधेरे से काफी डर लगता था।
“इंदिरा गांधी ने अपने संस्मरण ‘बचपन के दिन’ में इसका उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि मुझे अंधेरे से डर लगता था, जैसा कि शायद प्रत्येक छोटे बच्चे को लगता है। रोज शाम को अकेले ही निचली मंजिल के खाने के कमरे से उपरी मंजिल के शयनकक्ष तक की यात्रा मुझे बहुत भयभीत करती थी। लम्बे, फैले हुए बरामदे को पार करना, चरमराती हुई लकड़ी की सीढ़ियोंपर चढ़ना और एक स्टूल पर चढ़कर दरवाजे के हैंडिल और बत्ती के स्विच तक पहुंचना, किन्तु साहस के महत्व का ऐसा ज़जबा था कि मैंने निश्चय किया कि मुझे इस भय से स्वयं ही छुटकारा पाना है।“
आज़ादी के आन्दोलनों का नन्ही इन्दिरा के दिल पर अमिट प्रभाव रहा और 13 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने युवा लड़के-लड़कियों के लिए वानर सेना बनाई, जिसने विरोध प्रदर्शन और झंडा जुलूस के साथ साथ कांगेस के नेताओं की मदद में संवेदनशील प्रकाशनों तथा प्रतिबंधित सामग्रीओं का परिसंचरण कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में छोटी लेकिन उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी।
पाकिस्तान के साथ 1971 में हुए संग्राम में उन्होंने बांग्लादेश नाम से एक नए देश के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई जिससे वह पूरी दुनिया में दृढ़ इरादों वाली महिला के रूप में जानी जाने लगीं और अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा की संज्ञा दी। अपने साहसिक फैसलों के लिए मशहूर इंदिरा गांधी ने 1974 में पोखरण में परमाणु विस्फोट कर जहां चीन की सैन्य शक्ति को चुनौती दी, वहीं अमेरिका जैसे देशों की नाराजगी की कोई परवाह नहीं की। इन निर्णयों के चलते जहां उन्हें देश और दुनिया में बुलंद इरादों वाली महिला के रूप में तारीफ मिली, वहीं 1975 में आपातकाल लगा देने के कारण इंदिरा को विश्व बिरादरी की आलोचना का भी सामना करना पड़ा।
पंजाब में सिक्ख आतंकवादियों ने स्वायत्त राज्य की माँग पर ज़ोर देने के लिए हिंसा का रास्ता अपना लिया। जवाब में श्रीमती गांधी ने जून 1984 में सिक्खों के पवित्रतम धर्मस्थल अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर पर सेना के हमले के आदेश दिए, जिसके फलस्वरूप 450 से अधिक सिक्खों की मृत्यु हो गई। स्वर्ण मन्दिर पर हमले के प्रतिकार में पाँच महीने के बाद ही श्रीमती गांधी के आवास पर तैनात उनके दो सिक्ख अंगरक्षकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
करोड़ों लोगों की प्रिय प्रधानमंत्री का जीवन-इतिहास उपलब्धियों से भरा पड़ा है। दृढ़ इरादों और सटीक फैसलों वाली इंदिरा गांधी ने अपनी क्रांतिकारी सोच और अद्भुत प्रशासनिक क्षमता से विश्व में भारत को गौरवशाली राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया।
श्रीमति इंदिरा गांधी के जन्मदिवस पर निम्न पंक्तियों से अभिन्नदन करते हैं
“खुद अपने आपमें सिमटी हुई सदी हैं ये,
भारत रत्न से अलंकृत सबकी प्रियदर्शनी हैं ये,

कैसे जलाये रखें अपने अन्दर की चिंगारी को?

इस चिंगारी कि शुरआत कहाँ से होती है?
मुझे लगता है हम इसके साथ पैदा होते हैं. मेरे 3 साल के जुड़वाँ बच्चों में million sparks हैं. वो Spider-man का एक छोटा सा खिलौना देख के बिस्तर से कूद पड़ते हैं. Park में झूला झूल के वो thrilled हो जाते हैं. पापा से एक कहानी सुनके उनमे उत्तेजना भर जाती है. अपना Birthday आने के महीनो पहले से वो उलटी गिनती करना शुरू कर देते हैं कि उस दिन cake काटने को मिलेगा.
मैं आप जैसे students को देखता हूँ और मुझे आपके अन्दर भी कुछ spark नज़र आता है. पर जब मैं और बड़े लोगों को देखता हूँ तो वो मुश्किल से ही नज़र आता है. इसका मतलब, जैसे -जैसे हमारी उम्र बढती है, spark कम होते जाते हैं. ऐसे लोग जिनमे ये चिंगारी बिलकुल ही ख़तम हो जाती है वो मायूस, लक्ष्यरहित और कड़वे हो जाते हैं. Jab We met के पहले half की करीना और दुसरे half की Kareena याद है ना? चिंगारी बुझ जाने पे यही होता है.
तो भला इस Spark को बचाएँ कैसे?
Spark को दिए की लौ की तरह imagine कीजिये. सबसे पहले उसे nurture करने की ज़रुरत है उसे लगातार इंधन देने की ज़रुरत है. दूसरा, उसे आंधी-तूफ़ान से बचाने की ज़रुरत है.
Nurture करने के लिए, हमेशा लक्ष्य बनाएं .यह इंसान कि प्रवित्ति होती है कि वह कोशिश करे, सुधार लाये और जो best achieve कर सकता है उसे achieve करे. दरअसल इसी को Success कहते हैं. यह वो है जो आपके लिए संभव है. ये कोई बाहरी माप -दंड नहीं है जैसे company द्वारा दिया गया Package, कोई car या कोई घर.
हममे से ज्यदातर लोग middle-class family से हैं. हमारे लिए, भौतिक सुख -सुविधाएं सफलता की सूचक होती हैं, और सही भी है. जब आप बड़े हो जाते हैं और पैसा रोज़ -मर्रा कि ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़रूरी हो जाता है, तो ऐसे में financial freedom होना एक बड़ी achievement है.
लेकिन यह ज़िन्दगी का मकसद नहीं है. अगर ऐसा होता तो Mr. Ambani काम पर नहीं जाते. Shah Rukh Khan घर रहते और और -ज्यादा dance नहीं करते. Steve Jobs और भी अच्छा iPhone बनाने के लिए मेहनत नहीं करते, क्योंकि Pixar बेच कर already उन्हें कई billion dollars मिल चुके हैं. वो ऐसा क्यों करते हैं? ऐसा क्या है जो हर रोज़ उन्हें काम पर ले जाता है?
वो ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ये उन्हें ख़ुशी देता है. वो ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ये उन्हें जिंदादिली का एहसास करता है. अपने मौजूदा स्तर में सुधार लाना आपको एक अच्छा एहसास दिलाता है. अगर आप मेहनत से पढ़ें तो आप अपनी rank सुधार सकते हैं. अगर आप लोगों से interact करने का प्रयत्न करें तो आप interview में अच्छा करेंगे. अगर आप practice करें तो आपके cricket में सुधार आएगा. शायद आप ये भी जानते हों कि आप अभी Tendulkar नहीं बन सकते, लेकिन आप अगले स्तर पर जा सकते हैं. अगले level पे जाने के लिए प्रयास करना ज़रूरी है.
प्रकृति ने हमें अनेकों genes के संयोग और विभिन्न परिस्थितियों के हिसाब से design किया हैखुश रहने के लिए हमें इसे accept करना होगा, और प्रकृति कि इस design का अधिक से अधिक लाभ उठाना होगा. ऐसा करने में Goals आपकी मदद करेंगे.

कैसे बनेगा हमारा भारत महान?

मित्रों हर स्वतंत्रता दिवस पर हम महात्मा गाँधी, भगत सिंह सहित उन अनगिनत आज़ादी के दीवानों को याद करते हैं जिन्होंने हमें अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया…..आज भी मैं उन्हें नमन करता हूँ और उनके अमर बलिदान के सम्मान में अपना शीश झुकाता हूँ.
पर आज मैं उन वीर सपूतों की कुर्बानियां नहीं गिनाऊंगा… ना ही मैं उनके बलिदानों का लेखा-जोखा दूंगा….बल्कि आज मैं अपने देश के प्रति हमारे योगदान के बारे में बात करना चाहूँगा.
क्या आपने इस देश को महान बनाने के लिए कोई काम किया है या कर रहे हैं?
मैं आपसे एक प्रश्न करना चाहता हूँ…. कोई देश महान कब बनता है?
कोई देश महान तब बनता है जब उस देश के देशवासी महान बनते हैं….क्योंकि देश तो देशवासियों से ही बना होता है.
तो क्या हम सब भारत के वासी महान बन रहे हैं? क्या हम कुछ ऐसा कर रहे हैं जो हमें महान बनाता है? या कहीं हम इसका उल्टा तो नहीं कर रहे….
  • कहीं हम पान खा कर दीवारों पर तो नहीं थूक रहे….
  • कहीं हम अपने घर का कूड़ा सड़कों पर तो नहीं फेंक रहे….
  • कहीं हम कमरों में लाइट और पंखे खुला छोड़ बाहर तो नहीं टहल रहे ….
  • कहीं हम नल खुला छोड़ पानी की बर्बादी तो नहीं कर रहे ….
  • कहीं हम थाली में परोसा खाना छोड़ अन्न का अपमान तो नहीं कर रहे….
अफ़सोस हममें से ज्यादातर लोग ऐसा कर रहे हैं….और ऐसा करने का मतलब है कि हम महान नहीं बन रहे और अगर हम महान नहीं बन रहे तो ये देश कैसे महान बनेगा?
एक बूढ़े दादा जी पार्क में उदास बैठे थे…वहां खेल रहे बच्चों ने पूछा आप उदास क्यों हैं?
दादा जी बोले, “ जब मैं छोटा था तब मैं सोचता था कि एक दिन मैं देश को बदल कर रख दूंगा… जब थोडा बड़ा हुआ तो सोचा….भाई ये देश बदलना अपने बस की बात नहीं मैं तो बस इस शहर को बदल दूंगा…. लेकिन जब कुछ और समय बीता तो लगा ये भी कोई आसान काम नहीं है चलो मैं बस अपने आस-पास के लोगों को बदल दूंगा….
पर  अफ़सोस  मैं  वो  भी  नहीं  कर  पाया .
और  अब  जब  मैं  इस  दुनिया  में  कुछ  दिनों  का  ही  मेहमान  हूँ  तो  मुझे  एहसास  होता  है  कि   बस अगर  मैंने  खुद  को  बदलने  का  सोचा  होता  तो  मैं  ऐसा  ज़रूर  कर  पाता …और  हो   सकता  है  मुझे  देखकर  मेरे आस-पास के लोग भी बदल जाते …और  क्या  पता  उनसे  प्रेरणा  लेकर  ये  शहर भी  कुछ  बदल जाता … और  तब   शायद  मैं  इस  देश  को  भी  बदल  पाता !”
दोस्तों, कोई भी बड़ा बदलाव खुद से शुरू होता है… महात्मा गांधी ने कहा भी है
इसलिए अगर आप “मेरा भारत महान” बनाना चाहते हैं तो पहले खुद महान बनिए…और महान बनने के बीज इन छोटी-छोटी बातों में ही छिपे होते हैं…करने दीजिये दुनिया जो करती है बस अपनी जिम्मेदारी लीजिये बस खुद को बदलने का संकल्प कीजिये—
  • प्रण लीजिये कि आप स्वच्छता रखेंगे….
  • प्रण लीजिये कि आप बिजली बचायेंगे….
  • प्रण लीजिये कि आप पानी का संचय करेंगे…
  • प्रण लीजिये कि आप अन्न का अपमान नहीं करेंगे….
और यकीन जानिये जब आप ऐसा करेंगे तब भारत को सचमुच महान बनने से कोई नहीं रोक पायेगा….और तब हम सब गर्व से कह पायेंगे

Wednesday, August 9, 2017

जीवन में पैसे का महत्व

बहुत से अभिवावक अपने बच्चों को कहते है कि प्यार  के सामने पैसा कुछ नहीं होता । प्यार सबसे बड़ा होता है । वियक्ति का दिल खुला होना चाहिए । पैसे का क्या है ? मैं ऐसे अभिवावकों को चेलेंज करता हूँ कि वो प्यार से घर का राशन खरीद कर दिखाएँ ,बिजली,पानी और फ़ोन का बिल भर कर दिखाए गाड़ी में पेट्रोल भरवा कर दिखाएँ ।जीवन से जुडी बाकी जरूरते पूरी कर के दिखाए ।
अगर हम अपने बच्चों को यह सोच दे रहे है तो उन्हें भविष्य का कंगाल वियक्ति बना रहे है ।समझदार अभिवावक वही है जो बच्चे को जरा सा समझदार होते ही पैसे का महत्व समझाना सुरु कर दे ।जो बच्चों को समझते है कि जीवन में मर्यादाओं ,अनुशाशन व् परिश्रम का अपनी जगह महत्व है ।लकिन जब तक पैसा नहीं होगा जीवन कि गाड़ी नहीं चल सकेगी ।

What Makes a Good Relationship?


Every since we were children, we were taught the simplest lessons to be able to cope with the challenges of life and to be able to build good relationships with others. No man is an island and we need to learn to properly interact and coexist with our peers to be able to strive in the real world. Having good relationships will assure you that you will never have to live your life alone. The question is, what makes a good relationship?

We Share
Once you are in a good relationship, you are not just thinking about yourself. You learn to share what you have. This does not just include material things. You should also share your thoughts, your ideas, your dreams and even your frustrations. You both take turns doing things that you like together. You both learn to compromise and sacrifice some things that you used to just would rather keep all to yourself.
We Care
People in a good relationship are kind to each other. They care about each others stuff and make efforts to show how they value each other’s space. They both take the time to know what matters to the other and also give time to try out each other’s interests. Most of all, they care enough to listen to each other and do nice things for each other.
We Play Fair
A good relationship is a two-way traffic. Each one is allowed to move freely as an individual, but each action is done with consideration of the other one’s feelings. No one is above the other.
We Cooperate
A healthy union is bound by cooperation. The people involved work as a team to achieve one goal. Each one helps and supports the other to succeed in their individual endeavors. They compliment each other and so they grow together and as individuals as well.
We Work Hard
Maintaining a good relationships is hard work. Many relationships break up because they change and stop making the efforts to keep the love alive. Each one works hard to make sure that the relationship they have will stay strong and alive.
We Trust
Trust is a vital ingredient to any relationship. It is like glass that needs to be protected because once it is broken it can never be fixed. If two people trust each other fully then they are fortunate to be in their relationship.
We Respect
Another important factor to having a good relationship is respect for one another. No matter how compatible two people are they will have their differences. Each one should not try to change the other, instead there should be acceptance and respect for one another. That is how a healthy union works.
We Have Love
Love is the ultimate sign of a good relationship. But I am not talking about romantic love alone. I am talking about selfless love that makes people give up important things in their life just to make the other one happy. I am talking about a love that is willing to sacrifice everything just so they can be with each other.

Tuesday, August 8, 2017

कैसे बनें एक अच्छे वक्ता ?

1) तैयारी करें 

2) ये सोचें कि आपको सफल होकर आना है :

3) श्रोताओं से जुड़ें :

4) भाषण बिना देखे बोलें :

5) Eye contact बनाये रखें :

6) रुचि की बात करिये : 

7) गलती हो जाने पर घबराएं नहीं :

9) प्रशंसा से दिल जीतें :

Monday, July 31, 2017

कैसे सीखें अंग्रेजी बोलना ?

1. अपना महौल English बनाएं  : किसी  भी  भाषा  को  सीखने  में  जो  एक  चीज  सबसे  महत्त्वपूर्ण  होती  है  वो  है  हमारा  environment, हमारा  माहौल.  आखिर  हम  अपनी  मात्र -भाषा  छोटी  सी  ही  उम्र   में  कैसे  बोलने  लगते  हैं :- क्योंकि   24X7 हम  ऐसे  माहौल  में  रहते  हैं  जहाँ  वही  भाषा  बोली , पढ़ी, और  सुनी  जाती  है.  इसीलिए  अंग्रेजी  बोलना  सीखना  है  तो  हमें  यथा  संभव  अपने  माहौल  को  English बना  देना  चाहिए.  इसके  लिए  आप  ऐसा  कुछ  कर  सकते  हैं:
  • हिंदी  अखबार  की  जगह  English Newspaper पढना  शुरू  कीजिये.
  • हिंदी  गानों  की  जगह  अंग्रेजी  गाने  सुनिए.
  • अपने interest के English program / movies देखिये.
  • अपने  room को  जितना  English बना  सकते  हैं  बनाइये ….English posters, Hollywood actors,English  books,Cds..जैसे  भी   हो  जितना  भी  हो  make it English.
2. ऐसे लोगों के साथ group बनाएं जो आप ही की तरह स्पोकेन इंग्लिश सीखना चाहते हों : कुछ ऐसे  दोस्त   खोजिये  जो  आप   ही  की  तरह  अंग्रेजी  बोलना सीखना  चाहते  हैं.  अगर  आपके  घर  में  ही  कोई  ऐसा  है  तो  फिर  तो  और  भी  अच्छा  है. लेकिन  अगर  ना  हो  तो  ऐसे  लोगों  को  खोजिये, और  वो  जितना  आपके  घर  के  करीब  हों  उतना अच्छा  है. ऐसे दोस्तों  से  अधिक  से  अधिक  बात  करें  और  सिर्फ  English में. हाँ ,चाहें  तो  आप  mobile पर  भी  यही  काम  कर  सकते  हैं.
3. कोई mentor बना लें: किसी ऐसे व्यक्ति को अपना mentor बना लें जो अच्छी English जानता हो, आपका कोई मित्र, आपका कोई रिश्तेदार, कोई पडोसी, कोई अंग्रेजी सीखाने वाला institute….कोई भी जो आपकी मदद के लिए तैयार हो. आपको अपने मेंटर से जितनी मदद मिल सके लेनी होगी. अगर आप को मेंटर ना मिले तो भी मायूस होने की ज़रुरत नहीं है आप अपने efforts में लगे रहे, मेंटर मिलने सी आपका काम आसानी से होता लेकिन ना मिलने पर भी आप अपने प्रयास से यह भाषा सीख सकते हैं.
 4. पहले  दिन  से  ही correct English बोलने  का  प्रयास  मत  करें : अगर  आप  ऐसा  करेंगे  तो   आप   इसी  बात  में  उलझे  रह  जायेंगे  की  आप  सही  बोल  रहे  हैं  या  गलत. पहला  एक -दो  महिना  बिना  किसी  tension के   जो  मुंह  में  आये  बोले, ये  ना  सोचें  कि  आप  grammatically correct हैं  या  नहीं.  जरूरी  है  कि  आप  धीरे -धीरे  अपनी  झिझक  को  मिटाएं .
 5. English सीखने के लिए  Alert रहे : वैसे  तो  मैं  अपनी  spoken English का  श्रेय   अपने  school St.Paul’s को  देता हूँ  पर  अंग्रेजी  के लिए  अपनी  alertness की  वजह  से  भी  मैंने  बहुत  कुछ   सीखा  है. मैं  जब  TV पर  कोई  English program देखता  था  तो  ध्यान  देता  था  की  words को  कैसे  pronounce किया  जा रहा  है, और  किसी  word को  sentence में  कैसे  use  किया  जा रहा  है. इसके  आलावा  मैंने  नए  words सीखने  के  लिए  एक  diary भी  बनायीं  थी  जिसमे  मैं  newspaper पढ़ते  वक़्त जो  words नहीं  समझ  आते  थे  वो  लिखता  था, और  उसका use  कर  के एक  sentence भी  बनता  था, इससे  word की  meaning याद  रखने  में  आसानी  होती  थी.
6. बोल  कर  पढ़ें : हर  रोज  आप  अकेले  या  अपने  group में  तेज  आवाज़  में  English का  कोई  article या  story पढ़ें. बोल -बोल  कर   पढने  से  आपका  pronunciation सही  होगा, और  बोलने  में  आत्मविश्वास  भी  बढेगा.
 7. Mirror का use करें  : मैं  English बोलना  तो  जानता  था  पर  मेरे  अन्दर  भी  fluency की  कमी  थी, इसे ठीक  करने  के  लिए  मैं  अक्सर  अकेले  शीशे  के  सामने  खड़े  होकर   English में  बोला  करता  था. और  अभी  भी  अगर  मुझे  कोई  presentation या  interview देना  होता  है  तो  मैं  शीशे   के  सामने  एक -दो  बार  practice  करके  खुद  को  तैयार  करता  हूँ.  आप  भी  अपने  घर  में  मौजूद  mirror का  इस्तेमाल  अपनी  spoken English improve करने  के  लिए  कीजिये.  शीशे  के  सामने  बोलने  का  सबसे  बड़ा  फायदा  है  कि  आप  को  कोई  झिझक  नहीं  होगी  और  आप  खुद  को  improve कर  पाएंगे.
8. Enjoy the process: English बोलना  सीखेने  को  एक  enjoyment की  तरह  देखें  इसे अपने  लिए  बोझ  ना  बनाएं.  आराम  से  आपके  लिए  जो  speed comfortable हो  उस  speed से  आगे  बढें . पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  है  कि  आप  अपने  प्रयत्न  एकदम  से  कम   कर  दें, बल्कि  जब  आप  इसे  enjoy करेंगे  तो  खुद -बखुद  इस  दिशा  में  आपके  efforts और  भी  बढ़  जायेंगे.  आप  ये  भी  सोचें  कि  जब  आप  fluently बोलने  लगेंगे  तब  कितना  अच्छा लगेगा  , आप  का  confidence भी  बढ़  जायेगा  और  आप  सफलता  की  तरफ  बढ़ने  लगेंगे.
 9. English में सोचना शुरू करें : जब  इंसान  मन  में  कुछ  सोचता  है  तो  naturally वो  अपनी  मात्र  भाषा  में  ही  सोचता  है. लेकिन  चूँकि  आप  English सीखने  के  लिए  committed हैं  तो  आप  जो  मन  में  सोचते  हैं  उसे  भी  English में  सोचें. यकीन  जानिये  आपके  ये  छोटे -छोटे  efforts आपको  तेजी  से  आपकी  मंजिल  तक  पंहुचा  देंगे.
10. ऐसी  चीजें  पढ़ें जो समझने में बिलकुल आसान हों: बच्चों की English comics आपकी हेल्प कर सकती है, उसमे दिए गए pictures आपको story समझने  में हेल्प करेंगे और simple sentence formation भी आम बोल चाल में बोले जाने वाले सेंटेंसेस पर आपकी पकड़  बना देंगे.

Sunday, July 30, 2017

वर्षा ऋतु में जरुरी एहतियात बरते

• ध्यान रहे की खाने से पहले फल / सब्जी को अच्छे से स्वच्छ पानी से धो कर साफ कर ले,खास कर हरी पत्तेदार सब्जी।
• बासी भोजन,पहले से कटे हुए फल तथा दुषित भोजन का सेवन न करे ।
• हमेशा ताजा गरम खाना खाए।
• इस मौसम में सब्जी / फल जल्दी ख़राब हो जाते है इसलिए हमेशा ताजा फल या सब्जी का प्रयोग करे।
• इन दिनों में हमारी पाचन शक्ति सबसे कम होती है।इसलिए जरुरी है अधिक तला,भुना खाना न खाया जाए बल्की ऐसा भोजन खाया खाए जो आसानी से पच जाए।जब भूख लगे तब ही और जीतनी भूख हो उतना ही आराम से पचने लायक खाना लेना चाहिए।
• ज्यादा ठंडा,खट्टा न खाए।ज्यादा नमक वाली चीजे जैसे चिप्स,कुरकुरे,चटनी,पापड कम खाए क्योंकी इस मौसम मे शरीर मे water retention कि संभावना ज्यादा होती है।

अपने दातों का ऐसे रखे ख्याल जानिए कुछ जरुरी बातें

dental care  की हम बात करें तो हम जो भी अपने शरीर को चलाने और उर्जा देने के लिए भोजन ग्रहन करते है सब मुहं के रास्ते होकर पेट में जाता है और चूँकि हमारी भोजन सम्बन्धी आदतें अगर बेकार होती है तो आपको देर सबेर परेशानी का सामना उठाना पड़ सकता है क्योंकि health से जुडी सारी problems की mostly पेट से शुरुआत होती है | इसलिए अपने मुंह की साफ सफाई भी उतना ही जरुरी है जितना आपका हर रोज नहाना है | चलिए कुछ hindi में tips जानते है 
dental care  में रोजाना अपने दातों की सफाई करना और प्लांक kavity और वो भोजन के कण जो दातों में खाने के बाद भी फसे हुए रह जाते है उन्हें हटाना और जीभ की भी नियमित तौर से की सफाई ओरल हाईजीन में आती है | अगर आप अपनी दैनिक आदतों में नहाने के बाद deo लगाना भी नहीं भूलते है तो आपके लिए जरुरी है आप ओरल हाईजीन की term को भी अपनी जिन्दगी में लागू करें | हर रोज ब्रश के साथ साथ जीभ और फ्लोसिग के जरिये सही से सफाई रखते हुए मुंह को health problems से बचके रख सकते है |
प्लाक का जमाव – dental care  के दौरान प्लाक की बात करें तो यह असल में एक चिपचिपी परत होती है जो खाने के बाद सही से मुहं की देखभाल नहीं करने वालों के मसूड़ों और दातों के बीच में जम जाती है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम या तो ठीक से ब्रश नहीं करते है और यह करते ही नहीं है | इसके लिए आपको चाहिए एक तो सही विधि से doctor के परामर्श के अनुसार आप नियमित ब्रश करें और इस बात का ध्यान रखें कि शाम में भी खाने के बाद ब्रश करना चाहिए क्योंकि खाने के बाद जमी इस परत में कीटाणु हो सकते है जो आपके दातों की सेहत के लिए हानिकारक है और मसूड़ों को खराब करके कैविटी जमा देती है |
फ्लोसिग का ले सहारा – दातों और मसूड़ों के अलावा मुहं में ऐसी बहुत सारी जगहे होती है जन्हा ब्रश नहीं पहुँच पाते है और इसी वजह से यंहा बहुत कुछ चलता रहता है जो हमारे दातों की सेहत के लिए जरा भी अच्छा नहीं है इसलिए कुछ दूसरे तरीकों से आप यह कर सकते है ऐसे में फ्लोसिंग एक काम का जरिया है अपने मुहं की सफाई में ऐसे में दातों की बीच की जगह जन्हा आम ब्रश के रेशे नहीं पहुँच पाते है उनके बीच से प्लाक और केविटी और अन्य जमे हुए पदार्थो को निकलने का सबसे कारगर और आसान तरीका फ्लोसिंग ही है |dental care के लिए फ्लोसिंग एक की जाने वाली जरुरी क्रिया है |
दातों की सफाई में ये रखें ध्यान / important in dental care  –
  • एक तो बेहतरीन टूथपेस्ट का चुनाव करें और ऐसा आप टीवी add देखकर नहीं करें बल्कि अगर आपको दातों की कोई छोटी मोटी समस्या है तो उसके अनुसार अपने doctor से इस बारे में राय करलें और अजल रोग विशेष के अनुसार टूथपेस्ट भी आते है जो आपके दातों की सवेंदंशीलता से लेकर दूसरी समस्याओं को भी कवर करते है |
  • साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है कि ब्रश का चुनाव करते समय यह सावधानी रखे कि आपके दातों और मसूड़ों की नाजुक परत को वो कोई नुक्सान नहीं पहुंचाए और उसके रेशे नाजुक होने चाहिए |
  • न केवल दातों की बल्कि मसूड़े जो दातं उन्ही foundation पर खड़े है उनकी सही से देखभाल की जानी भी जरुरी है और इसके लिए आप मसूड़ों की मालिश कर सकते है पिपरमेंट के तेल से |
  • दातों को भी व्यायाम चाहिए होता है ऐसा करने के लिए आप ब्रश करने के बाद अपने ऊपर के दातं और नीचे के दातों को आपस में pressure के साथ दबाएँ और फिर खोल दें ऐसा करने से आपके मसूड़ों में खून का भाव भी नियमित हो जाता है |
  • मीठा कम खाएं क्योंकि ऐसी चीज़े जो चीनी से भरपूर होते है वो आपके मुहं में जाकर सदन पैदा करने के काम करती है क्योंकि जितने भी कार्बोहाइड्रेट युक्त खाध्य पदार्थ होते है वो हमारी दातों की इनेमल वाली पर्त को गला देते है इसलिए जरुरत से अधिक मीठे के शौकीन नहीं बने |
दातों की देखभाल नहीं करने से हो सकने वाले नुकसान / loss of unawareness about dental care  –
  • अगर आप दातों की सही से देखभाल नहीं करते है तो आपको मुंह की किसी भी तरह की बीमारी से सामना करना पड़ सकता है |
  • दातों में और मुहं में होने वाली समस्या के कारण व्यक्ति की खाने की आदतों में गड़बड़ हो जाती है जिस से सही मात्रा में भोजन नहीं ले पाते है जिसकी वजह से आपको पोषक तत्वों की कमी का अनुभव होता है और यह आपके लिए परेशानी का कारण बनती है और health problems का भी |
  • आपके दांत आपके जीवन भर साथ रहे इसके लिए आवश्यक है आप नशे से जुडी आदतों से दूर रहे और नियमित दातों की देखभाल करें क्योंकि तम्बाकू आदि से आपको मुहं के cancer की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है |

5 Ways to Improve Your English Communication Skills

1. Slow Down Your Speaking Speed

You might be an eloquent speaker when it comes to your mother tongue, but expecting the same standards from yourself when speaking in a foreign language may not be very realistic.

2. Give Yourself Time to Think

You may be worried that the people you’re talking to are impatient and would like you to say what you want as quickly as possible.
First of all, it may not be true – people often prefer a well-thought-out answer to a rushed one.

3. Learn Sentences, Not Only Words 

In a way, this will take the pressure off too. When you learn a new word, try to memorize a couple of sentences that contain it.
There might come a time when you can use one particular sentence with little, or no alteration at all. Unfortunately, many people learn words by heart, but have no idea how to use them in a sentence.

4. Learn to Listen

When speaking in a foreign language, you might be so focused on what you are saying and whether it’s correct or not, that you forget to listen to what others are saying.

5. Practice Your Interrogatives

We also need to keep in mind the fact that communication is a two-way process. Not only does it make you seem uninterested – even rude – if you don’t ask questions, you might also end up being the one who has to do all the talking. So, when you’ve run out of ideas about what to say next, remember: others might have something to add.
  • What are your views on that?
  • How about you? What do you think?
  • Why do you think there’s so much violence on TV?
Questions like this will keep the conversation going and will show your interest in other people’s opinion. They will also give you time to relax a little and start enjoying yourself.

अपने पालतू कुत्ते के साथ वाक करना रखेगा आपको सेहतमंद

Dogs को कुछ लोग पसंद करते है और कुछ नहीं भी करते यह अपनी पसंद पर निर्भर करता है और खासतौर पर लड़कियां जो है उनमे में से कुछ तो कुत्तों से डरती भी है लेकिन क्या आप जानते है आपके घर में अगर एक dog है तो आपके health के लिए यह अच्छा साबित हो सकता है | थोडा tricky fact है लेकिन फिर भी अगर हम इस बारे में बात करें तो आप पोस्ट के लास्ट में यह बेहतर समझ पाएंगे तो चलिए बात करते है dog health benefits for humans.
मूड ठीक करने में – अगर आपके पास आपका dog है तो यह आपकी मदद करता है आपके mood को बेहतर करने में और आपका bad mood जो है वो happy mood में चेंज करने में मदद करता है यह आपके शरीर में bad mood chemical कहे जाने वाले cortisol के स्तर को कम करते है और Good mood chemical कहे जाने वाले serotonin hormone के स्तर को बढ़ा देता है | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुत्तो में कमाल की क्षमता होती है mood को पहचानने की | ऐसे में हलकी चिंता और तनाव जो आपके ख़राब mood की वजह से होता है वो ठीक हो जाता है आपका pet अगर आपके साथ होता है तो |
दिल की बीमारियों से बचाने में – असल में जब आपके पास एक dog हो तो आप उसे घुमाने के बहाने घर से बाहर जाते है तब आप ज्यादा physical activities करते है तब से ज्यादा जब आप अकेले जाएँ | क्योंकि dog साथ में होता है तो वो थोड़ी अठखेलियां और शरारतें करता है इधर उधर आपसे छूटकर भागने की कोशिश करता है और आप उसे control करते है ऐसे में आपको दिल की बीमारियाँ होने की सम्भावना कम हो जाती है अगर आप अपने pet के साथ daily बाहर जाते है तो |यह आपको एक्टिव रखता है – जैसे कि हमने उपर बात की कि 1-1.5 घंटे की walk अगर आप करते है और अगर आपके साथ आपका dog होता है तो health benefits के नजरिये से आप 30 % तक ज्यादा physical activity करते है |
एलर्जिक पदार्थो के प्रति मजबूती – ऐसा अभी प्रमाणित नहीं है पूर्णत: तो लेकिन फिर भी शोध ये कहते है कि जो बच्चे बचपन के समय से ही pets या dogs के साथ बड़े होते है उनमें पर्यावरण के पदार्थो के प्रति allergy कम हो जाती है |
Blood pressure नियमित – एक शोध के अनुसार जो लोग अपने dog के साथ बाहर जाने का शौक रखते है उन लोगो में blood pressure नियमित रहता है उन कठिन परिस्थितियों में भी जब बाकि लोगो का नहीं होता है |
Cholestrol के लेवल का नियमन – dogs के साथ बाहर जाने वाले लोगो में cholestrol का स्तर भी नियमित हो जाता है क्योंकि यह स्तर हमारे दैनिक जीवन के रूटीन पर निर्भर करता है अगर हम ज्यादा एक्टिव है तो चीजे बेहतर होता है नहीं तो हमे health से जुडी कई तरह की परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है |
तो ये है dog health benefits for humans in hindi और अधिक जानकारी के लिए आप नीचे कमेन्ट कर सकते है साथ ही हमारी वेबसाइट से hindi में health अपडेट पाने के लिए आप हमसे फ्री ईमेल subscription भी ले सकते है या हमे गूगल या फेसबुक पर भी फॉलो कर सकते है |

एक फ़कीर और सिकंदर का राज्य

सिकंदर जब भारत लौटा तो एक फ़कीर से मिलने गया तो सिकंदर को आते देख फ़कीर हंसने लगा इस पर सिकंदर ने ने मन में किया कि ये तो मेरा अपमान है और फ़कीर से कहा “या तो तुम मुझे जानते नहीं हो या फिर तुम्हारी मौत आई है ” जानते हो मैं कौन हूँ | मैं हूँ सिकंदर महान |
इस पर फ़कीर और भी जोर जोर से हंसने लगा |उसने सिकंदर से कहा मुझे तो तुम में कोई महानता नजर नहीं आती मैं तो तुम्हे बड़ा दीन और दरिद्र देखता हूँ तो सिकंदर ने उस से कहा तुम पागल हो गये हो  मैंने पूरी दुनिया को जीत लिया है तो इस पर उस फ़कीर ने कहा ऐसा कुछ नहीं है तुम अभी भी साधारण ही हो  फिर भी तुम कहते तो मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ कि मान लो तुम किसी रेगिस्तान मे फंस गये और दूर दूर तक तुम्हारे आस पास कोई पानी का स्त्रोत नहीं है और कोई भी हरियाली नहीं है जन्हा तुम पानी खोज सको तो तुम एक गिलास पानी के लिए इस राज्य में से क्या दे दोगे |सिकंदर ने कुछ देर सोच विचार किया और उसके बाद बोला कि मैं अपना आधा राज्य दे दूंगा तो इस पर फ़कीर ने कहा अगर मैं आधे राज्य के लिए न मानू तो सिकंदर ने कहा इतनी बुरी हालत में तो मैं अपना पूरा राज्य दे दूंगा | फ़कीर फिर हंसने लगा और बोला कि तेरे राज्य का कुल मूल्य है ” बस एक गिलास पानी ” और तू ऐसे ही घमंड से चूर हुआ जा रहा है | वक़्त पड़ जाये तो एक गिलास पानी के लिए भी तेरा राज्य काफी नहीं होगा फिर रेगिस्तान में चिल्लाना खूब महान सिकंदर महान सिकंदर.

सीधी बिक्री ( डायरेक्ट मार्केटिंग) लाखों रुपये महीना कमाने का बिज़नेस ।

डायरेक्ट सेलिंग या मल्टीलेवल मार्केटिंग आज के युग में बढ़ती हुई इंडस्ट्री है ।आज आप किसी क्षेत्र में देख लो आपको कोई भी जॉब या कारोबार नहीं ...