Saturday, February 25, 2017

बुजुर्ग लोगों के जीवन में इन्टरनेट का महत्व।

मैं आज इस लेख लिखते हुए इस विचार पर ध्यान लगा रहा हूँ कि आज के इस भाग दौड़ के युग में जहाँ इंसान ने खूब तरक्की की है वही हमारे समाज में सयुंक्त परिवार में रहने वाले लोगों की संख्या में कमी आयी है।
पुराने समाये में लोग अपने दादा-दादी, माता-पिता,चाचा-चची,सबके साथ मिलजुल कर एक छत के निचे  रहते थे और लोगो की जरुरत भी कम थी परंतु आज छोटे परिवार का  चलन बढ़ गया है लोग अपनों से दूर होकर ज्यादा सुखी महसूस करने लगे है और आज कल इस तरह की जीवन शैली का चलन पि. जी. से सुरु हुआ है
आज कल लोग नोकरी या उच्च शिक्षा के लिए अपने घरो या अपने गांवों छोटे शहरो से दूर जाते है और उनकी आदते वैसे ही बन रही है। जैसे जैसे इंसान ने तरक्की की और शहरीकरण  बढ़ता जा रहा है। लोग शहरों की तरफ जाते गए और शहर बड़े होते गए और लोगों के दिल और उनकी सोच छोटी होती गयी।लोग अपने सगे संभंदियों का साथ या उनके साथ रहना पसंद नहीं करते  लकिन फ्रेंडशिप और लिवइन रिलेशनशिप जैसे विदेशी सामाजिक विव्स्थाओं में ज्यादा विश्वास करने लगे है 
इंसान की सोच में सामाजिक तथा पारिवारिक नैतिक मूल्यों का पतन हुआ है।
यह जो भी नैतिक पतन हुआ है उसकी एक बड़ी वजह यह है लोगों का रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की और जाना है । उच्च शिक्षा लेने गए बच्चे पहले अपने विद्यालयओ के छात्रावासों (होस्टल्स) में रहते है और उनको परिवार की बंदिशों से दूर रहते है उसी तरह से उनको नोकरी भी अपने शहर से दूर ही मिलती है तो वो पि. जी. में रहते है और इस प्रकार से बचपन से ही उनका स्वभाव घर परिवार से दूर रहने का बना हुआ होता है ।इस प्रकार लोग शिक्षा और वेतन (सैलरी) तो अच्छी पा लेते है परन्तु परिवार में मिलजुल कर रहना और इसका महत्व भूल जाते है ।यही कारन है की आज के समाज में परिवार बंट रहे है या यह कहना गलत नहीं होगा कि परिवार बिखर रहे है
यही कारण है कि आज कल वृद्धआश्रमो का चलन भी बहुत बढ़ गया है बड़े शहरो में वृद्धअकेले अपना जीवन व्यतीत करते है।उनके जीवन की इस लास्ट स्टेज पर जहाँ उनके साथ कोई नहीं होता तो उन्होंने अपने जीवन के इस खालीपन और अकेलेपन को दूर करने के लिए एक बहुत ही अच्छा तरीका निकल लिया है।
जैसे आज दुनिया तरक्की कर रही है वैसे ही वृद्धभी इन्टरनेट से जुड़ कर अपने अकेलेपन और खालीपन को दूर कर रहे है
हाल ही में प्रकाशित हुए एक सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि वर्ष 2050 में भारत में इसकी जनसंख्या का 19%
केवल इसके वृद्धलोगों का होगा

वृद्ध  लोगों ने अपना खालीपन स्काइप तथा फेसबुक जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर जाकर दूर किया है क्योंकि आज रिटायर्ड लोग अपना अकाउंट इन साइट्स पर क्रिएट कर रहे है और अपने बच्चों और ग्रैंडचिल्ड्रेन के साथ टच में रहते है वो इन साइट्स पर उनकी गतिविधियों को देख कर अपना समाये व्यतीत करते है। चाहे वो लोग अपनों से दूर होते है फिर भी अपने बच्चों के साथ महसूस करते है इसके इलावा वो लोग अपने हम उम्र लोगो के साथ अपने विचार बांट सकते है। इस सोशल मीडिया साइट्स ने उनके जीवन को एक नया रूप दिया है और वे अपनों को अपने पास महसूस कर रहे है

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